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सरसों ने बनाई अलग पहचान,खेतों में पीली चुनरिया से खुशहाल होगा किसान

करौली जिला अब कृषि क्षेत्र में सरसों उत्पादन से नई पहचान बना रहा है। मौसम और मिट्टी की अनुकूलता से उपज बढ़ी है, जिससे किसानों की आमदनी में इजाफा हुआ है। मांड क्षेत्र की सरसों उच्च तेल मात्रा और गुणवत्ता के कारण देशभर की मिलों में पसंद की जाती है। सरसों आधारित उद्योग और ऑयल प्रोसेसिंग यूनिट से रोजगार व औद्योगिक विकास के नए आयाम जुड़ रहे हैं।

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सरसों ने बनाई अलग पहचान,खेतों में पीली चुनरिया से खुशहाल होगा किसान

हिण्डौनसिटी. सेण्ड स्टोन के लिए ख्यात करौली जिला अब कृषि क्षेत्र में भी सोपान चढ़ रहा है। मौसम और मिट्टी की अनुकूलता के संयोग से सरसों के उत्पादन में जिले ने अपनी अलग पहचान कायम की है। वर्ष दर वर्ष बुवाई क्षेत्र और उपज में इजाफे से आमदनी बढऩे से किसान खुशहाल हो रहे हैं। मेरा जिला मेरी फसल के तहत बड़ी ऑयल प्रोसेङ्क्षसग यूनिट स्थापित करने के प्रोत्साहन और कृषि आधारित उद्योग से रोजगार बढ़ाने का प्रयास है। ताकि सरसों से किसान और व्यापारी की समृद्धि साथ जिले में औद्योगिक विकास के आयाम स्थापित हो सकें।
करौली जिले में अन्य फसलों की तुलना में सर्वाधिक सरसों की फसल होती है। कम लागत और अधिक दाम मिलने से किसानों का सरसों की खेती के प्रति रुझान लगातार बढ़ रहा है। औसतन जिले में 1.05 लाख से 1.10 लाख हैक्टेयर में सरसों की खेती होती है। सर्वाधिक उपज वाले नादौती क्षेत्र में खेतों में बुवाई सीजन के बाद तक जलभराव रहने से सरसों का रकबा कम हुआ है। इस बार 95 हजार के लक्ष्य की तुलना में 91 हजार 180 हैक्टेयर में बुवाई हुई है, जबकि गत वर्ष यह आंकड़ा 1 लाख 11 हजार हैक्टेयर था। इन दिनों पीले फूलों से लकदक खेतों में सरसों की फसल में फलियों में दाने भरने लगे है। खासबात यह है कि करौली जिले की सरसों में तेल की मात्रा 40-4& प्रतिशत होती है। मांड क्षेत्र की सरसों में तेल की मात्रा में 45-46 प्रतिशत हो जाती है। ऐसे में गुणवत्ता की ²ष्टि में ऑयल मिलों व दूसरे राज्यों में यहां की सरसों को ज्यादा पसंद करते हैं।

किसान कहिन
गांव ङ्क्षढढोरा के किसान रमेश चंद शर्मा और विष्णु डागुर ने बताया कि आम तौर पर चौबीसा क्षेत्र में रबी सीजन में गेहूं अधिक बोया जाता है, लेकिन इस बार क्षेत्र में गेहूं के साथ सरसों की भी खूब बुवाई की गई है। इसकी वजह मानसून का समय पर आना रहा। किसानों ने बाजरा की कटाई के तुरंत बाद सरसों की बुवाई कर दी। आज क्षेत्र के खेत पीले फूलों की चुनरिया ओढ़े हुए हैं और किसानों को अ‘छी उपज की उम्मीद है।
टॉपिक एक्सपर्ट

कृषि विभाग के सेवानिवृत संयुक्त निदेशक वी.डी. शर्मा ने बताया कि जिले में सरसों की फसल के लिए मौसम और मिट्टी का मिजाज कमोबेश अनुकूल रहता है। इसमें खराबे की संभावना कम रहती है। अधिक भाव रहने से किसानों के लिए नकदी फसल साबित होती है। इसका भंडारण भी अन्य फसलों की तुलना में आसान होता है। ऐसे में करौली जिले में रबी और खरीफ सीजन में सर्वाधिक रकबा सरसों का ही रहता है, जिससे यह मुख्य फसल के रूप में कायम है।

मांड क्षेत्र की सरसों में तेल की मात्रा अधिक होती है। अन्य से बेहतर गुणवत्ता होने से करौली जिले की सरसों की मांग मिलों व दूसरे जिलों में अधिक रहती है।
सौरभ बंसल, महामंत्री कृषि उपज मंडी व्यापार मंडल, हिण्डौनसिटी

जिले में सरसों की फसल के लिए मौसम और मिट्टी का मिजाज कमोबेश अनुकूल रहता है। कम खराबे और मंडी में अधिक भाव चलते किसानों में भी इसके प्रति रुझान बढ़ा है।
सियाराम मीना, सहायक निदेशक कृषि विभाग हिण्डौनसिटी।