
कानपुर। रंगों के पर्व होली में अब चंद दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में शहर के बाजारों में त्योहार की रंगत साफ नजर आने लगी है। प्रमुख बाजारों से लेकर मोहल्लों की छोटी-छोटी दुकानों तक रंग, गुलाल और पिचकारियों की भरमार है। खासकर बच्चों के लिए सजी रंग-बिरंगी और आकर्षक पिचकारियां उनका मन मोह रही हैं।
कार्टून वाली पिचकारियां बनी आकर्षण का केंद्र -
दुकानदारों ने इस बार बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए तरह-तरह की नई डिज़ाइन की पिचकारियां बाजार में उतारी हैं। मिशाइल पिचकारी, ड्रैगन पिचकारी के साथ-साथ कार्टून पात्रों वाली पिचकारियां खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। छोटा भीम और डोरीमॉन की तस्वीरों से सजी पिचकारियों की मांग सबसे अधिक बताई जा रही है। बच्चे अपने अभिभावकों के साथ बाजार पहुंचकर इन्हीं पिचकारियों की जिद कर रहे हैं।
हालांकि अभी खरीदारी की शुरुआत ही हुई है, लेकिन दुकानदारों का कहना है कि अगले दो-तीन दिनों में बाजार में खरीदारों की भीड़ बढ़ने की पूरी संभावना है। वे बताते हैं कि जैसे-जैसे होली नजदीक आएगी, रंग, गुलाल और पिचकारियों की बिक्री में तेजी आएगी।
बाजार में अन्य प्रकार की भी है पिचकरिया -
बाजार में गन पिचकारी, बैलून पिचकारी, पाइप पिचकारी, पेंसिल पिचकारी, मछली आकार की पिचकारी और टैंक पिचकारी भी उपलब्ध हैं। छोटे बच्चों के लिए हल्की और रंगीन पिचकारियां लाई गई हैं, जबकि बड़े बच्चों के लिए लंबी रेंज तक पानी फेंकने वाली पिचकारियां खास पसंद की जा रही हैं। इसके अलावा दुकानों पर तरह-तरह के मुखौटे और सजावटी सामान भी सजे हैं। रंगीन विग, जोकर मास्क, सुपरहीरो मास्क और आकर्षक चश्मे बच्चों और युवाओं को लुभा रहे हैं। कई स्थानों पर हर्बल गुलाल और प्राकृतिक रंगों की भी बिक्री शुरू हो गई है, जिससे लोग सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होली मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
क्या कहते हैं लोग -
सुनील वर्मा, आवास विकास निवासी ने बताया कि होली का त्योहार आते ही बाजारों की रौनक अलग ही दिखने लगती है। इस बार बच्चों के लिए नई-नई डिजाइन की पिचकारियां आई हैं, जिससे वे काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि वे हर साल बच्चों के लिए कुछ खास खरीदते हैं और इस बार मिशाइल पिचकारी पसंद आई है।
मोहिनी वर्मा, अंबेडकर पुरम निवासी ने बताया कि बाजार में रंग-बिरंगे गुलाल और आकर्षक पिचकारियां देखकर बच्चों का मन मचल जाता है। उन्होंने कहा कि अब लोग हर्बल रंगों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। त्योहार को सुरक्षित और खुशी से मनाना ही सबसे जरूरी है।
प्रशांत कुमार, इंदिरा नगर निवासी ने बताया कि अभी भीड़ कम है, लेकिन दो-तीन दिन बाद बाजारों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि वे पहले ही खरीदारी कर लेना बेहतर समझते हैं ताकि भीड़ से बचा जा सके और अच्छे विकल्प मिल सकें।
किशोर त्रिपाठी, गीता नगर निवासी ने बताया कि होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और खुशी बांटने का पर्व है। उन्होंने कहा कि बाजार में इस बार बच्चों के लिए कार्टून वाली पिचकारियों की ज्यादा मांग दिख रही है, जिससे त्योहार का उत्साह और भी बढ़ गया है।
Updated on:
01 Mar 2026 01:33 pm
Published on:
01 Mar 2026 01:10 pm
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