12 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Kanpur Gas Crisis: कॉमर्शियल सिलेंडर गायब, 1700 का सिलेंडर 2000 में ब्लैक, कारोबारियों की बढ़ी टेंशन

Commercial LPG Cylinder Crisis : कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की सप्लाई रुकने से कानपुर में होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई और नमकीन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ब्लैक मार्केटिंग बढ़ने के साथ-साथ कारोबारियों को वैकल्पिक ईंधन की तलाश करनी पड़ रही है। अगर जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो शहर के खाद्य कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

2 min read
Google source verification

Kanpur में कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की सप्लाई पर रोक के बाद होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई और नमकीन कारोबार से जुड़े हजारों व्यापारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शहर में कई छोटे-बड़े खाद्य कारोबार गैस की कमी के कारण प्रभावित होने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर बाजार में कालाबाजारी भी शुरू हो गई है, जिससे कारोबारियों की परेशानी और बढ़ गई है।

व्यापारियों के अनुसार 19 किलो का कॉमर्शियल गैस सिलिंडर कुछ समय पहले तक करीब 1700 रुपये में मिल रहा था, लेकिन सप्लाई बाधित होने के बाद अब यही सिलिंडर ब्लैक में 2000 रुपये या उससे अधिक में बेचा जा रहा है। होली के त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के कारण कई जगह सिलिंडर मिलना भी मुश्किल हो गया है।

असंगठित खाद्य कारोबार पर सबसे ज्यादा असर

कानपुर में छोला-भटूरा, पूड़ी-सब्जी, जलेबी, खस्ता, समोसा और इमरती जैसे खाद्य पदार्थों का बड़ा असंगठित बाजार है। अनुमान के मुताबिक इस सेक्टर में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर इन्हीं छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।कई दुकानदारों का कहना है कि गैस नहीं मिलने से उन्हें अपना काम सीमित करना पड़ रहा है, जबकि कुछ जगहों पर तो उत्पादन ही बंद करना पड़ा है। मिठाई और नमकीन बनाने वाले बड़े कारखानों में भी कामकाज प्रभावित होने लगा है।

होली से पहले खत्म हो गया गैस का स्टॉक

एक बड़ी सप्लाई चेन के फ्रेंचाइजी संचालक ने बताया कि होली के कारण बिक्री बढ़ी और गैस का स्टॉक तेजी से खत्म हो गया। ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था करना भी आसान नहीं है। उनके मुताबिक पूड़ी, जलेबी, इमरती और छोला-भटूरा जैसे उत्पाद गैस पर ही तैयार होते हैं। कोयला, लकड़ी या डीजल भट्ठी का इस्तेमाल करना संभव नहीं है। इसलिए फिलहाल कई दुकानों पर इन उत्पादों का निर्माण रोकना पड़ा है।

नमकीन उद्योग पर भी मंडरा रहा संकट

उत्तर प्रदेश नमकीन निर्माता संघ के अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश में नमकीन बनाने वाले करीब 25 प्रतिशत कारखाने गैस आधारित भट्टियों पर चलते हैं। गैस की सप्लाई बाधित होने से इन कारखानों में उत्पादन रुकने का खतरा बढ़ गया है।उन्होंने बताया कि कई कारोबारियों ने अब डीजल भट्ठी और इलेक्ट्रिक भट्ठी बनवाने के ऑर्डर देना शुरू कर दिया है ताकि उत्पादन पूरी तरह बंद न करना पड़े।

इंडक्शन चूल्हों की मांग में अचानक उछाल

गैस संकट की आशंका के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी मनीष सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की मांग करीब 10 गुना तक बढ़ गई है।उनके मुताबिक पहले एक महीने में करीब 5 इंडक्शन चूल्हे बिकते थे, लेकिन अब एक ही दिन में 10-10 पीस तक बिक्री हो रही है। कई होटल और छोटे दुकानदार गैस के विकल्प के तौर पर इंडक्शन का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं।

क्या बोले कारोबारी

राजेश गुप्ता, मिठाई कारोबारी – किदवई नगर, ने बताया कि गैस नहीं मिलने से मिठाई और नमकीन बनाने में दिक्कत हो रही है। अगर जल्द सप्लाई शुरू नहीं हुई तो उत्पादन घटाना पड़ेगा।

इरफान खान, छोला-भटूरा विक्रेता – बेकनगंज, ने बताया कि रोज का कारोबार गैस पर निर्भर है। ब्लैक में सिलिंडर खरीदने से लागत बढ़ रही है और मुनाफा लगभग खत्म हो गया है।

सुनील अग्रवाल, रेस्टोरेंट संचालक – गोविंद नगर, ने बताया कि होली के समय ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन गैस संकट की वजह से कई डिश मेन्यू से हटानी पड़ी हैं।

पंकज तिवारी, स्नैक्स दुकानदार – कल्याणपुर, ne बताया कि जलेबी और समोसा बनाने में गैस जरूरी है। गैस की कमी से रोजाना की बिक्री प्रभावित हो रही है।

#USStrikesVenezuelaमें अब तक