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कैंसर को मात देकर बने सैकड़ों मरीजों की उम्मीद, विश्व कैंसर दिवस पर ओम प्रकाश सक्सेना की प्रेरणादायक कहानी

Cancer Survivor Story: कानपुर में विश्व कैंसर दिवस पर कैंसर को मात देने वाले ओम प्रकाश सक्सेना ने जेके कैंसर संस्थान में मरीजों और तीमारदारों से मुलाकात कर हौसले और सकारात्मक सोच का संदेश दिया।

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कैंसर को मात देकर बने सैकड़ों मरीजों की उम्मीद..

World Cancer Day Kanpur: कानपुर में विश्व कैंसर दिवस के मौके पर एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने मरीजों और उनके परिजनों को नई ऊर्जा दी। वित्त विभाग में असिस्टेंट ऑडिट ऑफिसर रहे ओम प्रकाश सक्सेना, जिन्होंने खुद कैंसर से 24 साल तक संघर्ष किया, आज सैकड़ों कैंसर मरीजों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।

वर्ष 2002 में महज 51 साल की उम्र में जांच के दौरान उन्हें मल्टीपल प्लाज्मा साइटोमा और मल्टीपल मायलोमा होने की पुष्टि हुई थी। इलाज के लंबे दौर और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

मरीजों के बीच प्रेरणा का संदेश

विश्व कैंसर दिवस पर ओम प्रकाश सक्सेना जेके कैंसर इंस्टीट्यूट पहुंचे, जहां उन्होंने मरीजों और उनके तीमारदारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि कैंसर से लड़ाई सिर्फ दवाओं और इलाज से नहीं, बल्कि मजबूत मानसिकता और परिवार के सहयोग से भी जीती जाती है।

उनका मानना है कि भावनात्मक सपोर्ट और सकारात्मक सोच मरीजों की इम्युनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डॉक्टरों पर विश्वास और जीवन को लेकर आशावादी दृष्टिकोण रखने से कठिन से कठिन हालात भी आसान हो जाते हैं।

स्तन कैंसर सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी से नई उम्मीद

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य विभाग में स्तन कैंसर की उन्नत सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी की सुविधा ने मरीजों के लिए नई राह खोली है। प्राचार्य डॉ. संजय काला की निगरानी में सर्जरी टीम ने सफल ऑपरेशन कर मरीज की शारीरिक बनावट को सुरक्षित रखने की दिशा में अहम कदम उठाया है। डॉक्टरों के अनुसार, इस तकनीक से न सिर्फ कैंसर को हटाया जाता है बल्कि मरीज के आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को भी बनाए रखा जाता है।

डिजिटल जांच और प्रशिक्षण से बेहतर इलाज

विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति विभाग और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में महिलाओं को स्तन कैंसर की गांठ की पहचान और समय पर जांच के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया। विभागाध्यक्षों ने बताया कि समय रहते जांच कराने से कैंसर के इलाज में सफलता की संभावना 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसके साथ ही डॉक्टरों की टीम द्वारा डिजिटल माध्यम से जांच की नई तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि मरीजों तक त्वरित और सटीक इलाज पहुंच सके।

हेलट में खुलेगा डे-केयर सेंटर, इलाज होगा आसान

कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर यह है कि हेलट अस्पताल में जल्द ही डे-केयर सेंटर शुरू किया जाएगा। इस सुविधा के तहत मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए कई दिनों तक भर्ती नहीं रहना पड़ेगा। मरीज उसी दिन इलाज कराकर घर लौट सकेंगे। प्रबंधन के अनुसार, इससे अस्पतालों पर बोझ भी कम होगा और मरीजों को मानसिक रूप से भी राहत मिलेगी।

परिवार की भूमिका

ओम प्रकाश सक्सेना का कहना है कि कैंसर की लड़ाई में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और यही वजह रही कि वे कभी टूटे नहीं। आज वे न सिर्फ खुद एक स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, बल्कि अस्पतालों में जाकर अन्य मरीजों को भी यह विश्वास दिलाते हैं कि कैंसर कोई अंत नहीं, बल्कि एक चुनौती है जिसे हिम्मत से जीता जा सकता है।