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बाबा विश्वनाथ और गौरी शंकर शिवालय में उमड़ी भक्तों का तांता, स्वयंभू शिवलिंग का भव्य श्रृंगार

Kannauj Mahashivratri Gauri Shankar Mandir and Baba Vishwanath: महाशिवरात्रि के अवसर पर कन्नौज स्थित बाबा विश्वनाथ और गौरी शंकर शिवालय में भक्तों का तांता लगा है। गौरी शंकर मंदिर छठवीं शताब्दी का है।‌

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जलाभिषेक के लिए उमड़ी भीड़, फोटो सोर्स- पत्रिका

फोटो सोर्स- पत्रिका

Baba Vishwanath, Gauri Shankar temples Shivalinga: कन्नौज स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर में शिवजी पर जलाभिषेक और दर्शन करने से वही फल मिलता है जो काशी में बाबा विश्वनाथ के मंदिर में जलाभिषेक से प्राप्त होता है। शिवालय का शिवलिंग स्वयंभू है; यह स्वतः प्रकट हुआ है। मान्यता है कि सावन के महीने में शिव पुराण की कथा सुनने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भोले बाबा पर जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में भक्तों ने की भीड़ उमड़ी है। हर हर महादेव के जय जयघोष से मंदिर परगना शिवालय परिसर गूंज उठा है। इसके साथ ही प्राचीन गौरीशंकर मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा है। स्वयंभू शिवलिंग की शुरुआत आज हल्दी लेप के साथ हुई। 10 कुंतल फूलों से बाबा का श्रृंगार किया जाएगा।

सुबह से उमड़ी भक्तों की भीड़

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में बाबा विश्वनाथ का प्राचीन मंदिर भक्तों के बीच आस्था का केंद्र बना रहा। आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ जलाभिषेक के लिए उमड़ी। प्राचीन टीले पर स्थित बाबा विश्वनाथ के मंदिर तक पहुंचने के लिए तीन तरफ से सीढ़ियां बनी हैं। बाबा विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग का रास्ता है। सबसे नजदीक कन्नौज रेलवे स्टेशन है। उल्लेखनीय है कि बाबा विश्वनाथ शिवालय के शिवलिंग स्वयंभू हैं।

गौरी शंकर मंदिर में भक्तों का लगता तांता

प्राचीन गौरीशंकर मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा।‌ दिन में तीन बार भोले बाबा का श्रृंगार किया गया। सुबह के समय हल्दी का लेप लगाया गया।‌ मंदिर को गेंदा के फूलों से सजाया गया, जिसमें कमल और गुलाब फूल का भी इस्तेमाल किया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी अनिरुद्ध दीक्षित ने बताया कि हल्दी अर्पित करने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। 10 कुंतल फूलों से भोले बाबा का श्रृंगार किया जाएगा। गौरी शंकर मंदिर गंगा नदी के तट पर स्थित है। गंगा स्नान के बाद भक्त भोले बाबा का जलाभिषेक कर रहे हैं। गौरी शंकर मंदिर छठवीं शताब्दी का है। यहां पर भोले बाबा के साथ मां पार्वती और गणेश भगवान कार्तिकेय के साथ विराजमान हैं।