29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Success Story: पहले इकलौते भाई, फिर पति को खोया, फिर भी 2 मासूमों की मां ने नहीं मानी हार, हासिल किया ऐसा मुकाम

जोधपुर जिले के तिलवासनी गांव की मंजू मेघवाल ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। संघर्षों से जूझते हुए उन्होंने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर पटवारी पद तक का सफर तय किया।

2 min read
Google source verification
Success Story, Manju Meghwal, Today Success Story, Patwari News, Patwari Success Story, Jodhpur News, Rajasthan News, सक्सेज स्टोरी, मंजू मेघवाल, टुडे सक्सेज स्टोरी, पटवारी न्यूज, पटवारी सक्सेज स्टोरी, जोधपुर न्यूज, राजस्थान न्यूज

परिजनों और दो बच्चों के साथ मंजू। फोटो- पत्रिका

जोधपुर। समाज अक्सर स्त्री को उसकी परिस्थितियों के तराजू पर तौलता है। विधवा होते ही उसे कमजोर मान लिया जाता है और उसकी क्षमताओं पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं, लेकिन तिलवासनी गांव की बेटी मंजू मेघवाल ने अपने साहस, धैर्य और आत्मविश्वास से इन तमाम धारणाओं को गलत साबित कर दिया।

वरिष्ठ अध्यापक शेरसिंह पंवार ने बताया कि 20 मई 2013 को मंजू मेघवाल का विवाह हुआ। जीवन सामान्य गति से आगे बढ़ ही रहा था कि नियति ने एक के बाद एक कठोर आघात दिए। विवाह के मात्र ढाई माह बाद 3 अगस्त 2013 को उनके इकलौते भाई महेंद्र का आकस्मिक निधन हो गया। परिवार इस सदमे से उबरा भी नहीं था कि अगस्त 2016 में पति का भी असमय देहांत हो गया।

मजदूरी ही परिवार की आजीविका

उस समय मंजू की गोद में दो छोटे बच्चे थे। पिता की मानसिक स्थिति कमजोर थी और माता परिवार की जिम्मेदारियों व आर्थिक संकट से जूझ रही थीं। मजदूरी ही परिवार की आजीविका का एकमात्र सहारा थी। पति और भाई के निधन के बाद मंजू ने दसवीं के बाद की पूरी पढ़ाई अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में पूरी की। विधवा पेंशन और पालनहार योजना के सहारे जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाई।

उन्होंने निजी स्कूल में अध्यापन किया, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया, किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई जारी रखी और साथ ही बच्चों, माता-पिता तथा स्वयं की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। वर्ष 2018 में सीनियर सेकंडरी, 2021 में स्नातक और 2023-24 में बीएड की पढ़ाई पूरी की।

यह वीडियो भी देखें

असफलता से हार नहीं मानी

इस दौरान अनेक प्रतियोगी परीक्षाएं दीं। कई बार सफलता करीब आकर छूट गई, लेकिन हर असफलता ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया। अंततः वर्ष 2025 में जनरल कैटेगरी से पटवारी पद पर चयन ने उनके कई साल के संघर्ष और त्याग को सार्थक कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता गणपत मेघवाल ने कहा कि तिलवासनी की बेटी आज संघर्षरत महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

Story Loader