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2000 में जर्दा, 3500 में बीड़ी का बंडल, बलात्कार के आरोपी ने अधीक्षक-जेलर पर लगाए आरोप, सेंट्रल जेल में सनसनी

जमानत पर रिहा आरोपी ने जेल अधिकारियों पर अवैध वसूली और वीआईपी सुविधाएं देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं जेल प्रशासन ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

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आरोपी हरीश कुमार सैनी। फोटो- पत्रिका

जोधपुर। जोधपुर सेन्ट्रल जेल एक बार फिर सुर्खियों में है। बलात्कार व धोखाधड़ी के आरोप में जेल में बंद रहे एक युवक ने जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत, जेलर हनवंत सिंह और एक मुख्य प्रहरी पर अवैध वसूली के आरोप लगाए हैं। उसने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर रुपए देने पर जेल में हर सुविधा मिलने और बंदियों के पास मोबाइल होने के आरोप भी लगाए हैं। उधर, जेल अधीक्षक ने बंदी के आरोपों को झूठा और निराधार बताया है।

जमानत पर बाहर हरीश कुमार सैनी ने वायरल वीडियो में कहा कि 19 सितंबर 2024 को उसे जेल भेजा गया था, जहां शाम को जेल अधीक्षक व अन्य दूसरी बैरक में बंद करने आए। उससे 30 व 40 हजार से लेकर दो लाख रुपए तक की वसूली का दबाव डाला गया।

जेल में नाम के प्रथम अक्षर के हिसाब से बैरक मिलती है। बैरक में लाइट और पानी नहीं था। फिर भी बगैर वसूली के बैरक नहीं बदली गई। रुपए देने पर जेल में हर सुविधा मिल रही थी। जेल अधिकारियों ने उस पर दबाव डालकर खातों में रुपए जमा करवाए। इसके सभी सबूत होने का दावा किया।

रुपए देने पर जेल में VIP सुविधा

वीडियो में बंदी ने आरोप लगाया कि रुपए देने पर बंदियों को VIP ट्रीटमेंट मिलता है। लंगर के कैदियों और सेल्स में बंदियों के पास मोबाइल हैं, जो रुपए देने वालों को कॉल कराते हैं। उसने भी बतौर सबूत एक-दो बार परिजन से मोबाइल पर बात की थी। जेल में जर्दा एक से दो हजार, बीड़ी बंडल 35 सौ और पुड़ियां 15 सौ रुपए में मिलती है। अवैध वसूली बाहर परिजन से खातों में जमा करवाई जाती है, जिनमें जेल अधिकारियों का कमीशन भी होता है।

14 दिन सेल में भेजा, एक माह रखा

बंदी का आरोप है कि उसने वसूली का विरोध भी किया था। साथी बंदी से झगड़ा करने का बताकर उसे और बंदी सुरेश घांची को 14 दिन के लिए सेल में भेज दिया गया था, लेकिन उसे एक माह तक वहीं रखा गया। उसका आरोप है कि बंदी की मृत्यु होने पर अधिकारियों के खास बंदियों से औपचारिकता के लिए हस्ताक्षर करवाए जाते हैं, जिससे रिपोर्ट पक्ष में बनती है।

रुपए देने वाले का जेल ट्रांसफर नहीं करते

बंदी का दावा है कि शिकायत करने वाले कैदियों को सजा मिलती है और उन्हें दूसरी जेल में ट्रांसफर कर दिया जाता है। सुरेश घांची बार-बार झगड़ा करता है, लेकिन जेल अधिकारियों को रुपए देने के कारण उसका ट्रांसफर नहीं किया जाता। वह कमाऊ बंदी है।

बार-बार शिकायतें करने पर उसे कोटा जेल भेज दिया गया था, लेकिन उसकी एसटीडी नहीं भेजी गई। मुख्यालय में शिकायत की तो उसे ही दोषी माना गया। मजिस्ट्रेट के मार्फत कोर्ट में शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। इस बारे में मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत भेजी थी।

यह वीडियो भी देखें

इच्छामृत्यु व भूख हड़ताल की चेतावनी

बंदी ने जेल में अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उसने कहा कि न्याय न मिलने पर उसे इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। उसने विधानसभा के बाहर भूख हड़ताल की चेतावनी भी दी। सूरसागर थाने में दर्ज बलात्कार व धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने हरीश को गिरफ्तार किया था। उसे 19 सितंबर 2024 को जेल भेजा गया था, जहां से आठ महीने बाद 14 मई को उसे कोटा जेल ट्रांसफर कर दिया गया।

आरोप निराधार हैं

जेल में बंद रहने के दौरान बंदी का नियम विरुद्ध आचरण था। शिकायत मिलने पर उसका कोटा जेल स्थानांतरण किया गया था। उसने जो आरोप लगाए हैं, वे झूठे और निराधार हैं।

  • प्रदीप लखावत, अधीक्षक, जोधपुर सेन्ट्रल जेल

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