
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए। फोटो- पत्रिका
जोधपुर। डॉ. एस.आर. राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने कहा कि रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग के कारण मरु प्रदेश के सौंफ, जीरा, मेथी जैसे मसालों की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी “मसाला फसलों का निर्यातोन्मुख उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन” के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो. शुक्ल ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि भारत मसालों के क्षेत्र में विश्व स्तर पर पहचान रखता है, इसलिए किसानों को मसालों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देनी चाहिए। कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वी.एस. जैतावत ने कहा कि वर्तमान में मसालों के निर्यात में कई समस्याएं आ रही हैं। कई बार गुणवत्ता के मापदंडों पर हमारे मसाले खरे नहीं उतर पाते।
इसकी प्रमुख वजह सौंफ, जीरा, मेथी, रायड़ा सहित अन्य मसालों के उत्पादन में कीटनाशकों का उपयोग है, जिससे उनका स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसलिए आवश्यक है कि किसान अब जैविक खेती अपनाएं।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के डीन, निदेशक, अधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
Updated on:
13 Feb 2026 08:57 pm
Published on:
13 Feb 2026 08:54 pm
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