झालावाड़, Jun 02, 2026

झालावाड़ डॉग स्क्वायड
-चोरी की गुत्थियों से लेकर ड्रग तस्करी तक, हर बड़े केस में खल रही खोजी श्वानों की कमी
झालावाड़। अपराधियों के सुराग कई बार आंखों से नहीं बल्कि सूंघने से मिलते हैं। पुलिस में “खामोश फोर्स” कहलाने वाला डॉग स्क्वायड आज भी झालावाड़ जिले में मौजूद नहीं है। हत्या, चोरी, डकैती और मादक पदार्थ तस्करी जैसे मामलों में पुलिस को हर बार कोटा से श्वान दल बुलाना पड़ता है, तब तक घटनास्थल के कई अहम सुराग मिट चुके होते हैं और अपराधी पुलिस की पकड़ से दूर निकल जाते हैं।
जिले में बढ़ते अपराधों के बीच अपना डॉग स्क्वायड नहीं होना स्थानीय पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। चोरी और ब्लाइंड मर्डर जैसे मामलों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे अहम माने जाते हैं, लेकिन कोटा से टीम पहुंचने में लगने वाला समय जांच की रफ्तार धीमी कर देता है। कई बार अपराध स्थल पर मौजूद गंध, पैरों के निशान और अन्य संकेत खत्म हो जाते हैं।
सारोला और मनोहरथाना क्षेत्र के आंवलहेड़ा में हुई बड़ी चोरियों का अब तक खुलासा नहीं हो सका। इन वारदातों में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे और बदमाश मोबाइल तक साथ नहीं लाए थे। ऐसे में पुलिस के पास तकनीकी सुराग बेहद सीमित रहे। यदि समय रहते खोजी डॉग स्क्वायड पहुंच जाता तो बदमाशों के आने-जाने के रास्ते और संभावित ठिकानों तक पहुंचना आसान हो सकता था।
भालता और भवानीमंडी क्षेत्र मादक पदार्थ तस्करी के लिहाज से संवेदनशील बनते जा रहे हैं। ट्रेन मार्ग होने के कारण तस्कर आसानी से आवाजाही कर रहे हैं। जिले में लगातार मादक पदार्थ तस्कर पकड़े जा रहे हैं, लेकिन नारकोटिक डिटेक्टर डॉग्स की मदद मिले तो ऐसे नेटवर्क तक पहुंचना और आसान हो सकता है।
पुलिस के प्रशिक्षित श्वान अपराधियों की गंध पकड़कर उनके भागने का रास्ता तलाश सकते हैं। ये नशीले पदार्थ, विस्फोटक और छिपाए गए सामान तक सूंघकर खोज निकालते हैं। कई बार जहां तकनीक और सीसीटीवी फेल हो जाते हैं, वहां डॉग स्क्वायड जांच की सबसे मजबूत कड़ी बन जाता है।
अपराधों को देखते हुए जिले में डॉग स्क्वायड की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ब्लाइंड मर्डर जैसे मामलों में इससे काफी मदद मिल सकती है। मुख्यालय से प्रस्ताव मांगे जाने पर भेजा जाएगा।
Published on: 02 Jun 2026 11:53 am

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