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झालावाड़, May 28, 2026

Jhalawar: 9 साल से पिला रहे ‘फ्री जल’, गर्मियों में छाछ की भी करते हैं व्यवस्था, मां की याद में शुरू किया था प्याऊ

Free Water Social Work In Jhalawar: झालावाड़ के सुनेल कस्बे में एक प्याऊ पिछले 9 सालों से भीषण गर्मी में राहगीरों के लिए राहत का केंद्र बना हुआ है। समाजसेवी गोविंद धाकड़ अपनी मां की स्मृति में यहां निशुल्क ठंडा पानी और छाछ उपलब्ध करवा रहे हैं।

free water stoppage

शीतल जल और छाछ पीते लोग (फोटो: पत्रिका)

Human Angle Story: भीषण गर्मी में जहां राहगीर पानी और छांव के लिए परेशान नजर आते हैं, वहीं सुनेल कस्बे के महाराणा प्रताप तिराहे पर संचालित एक प्याऊ मानवता और सेवा की मिसाल बनी हुई है। समाजसेवी गोविंद धाकड़ अपनी माता दरियाव बाई मंडलोई की स्मृति में पिछले नौ वर्षों से यहां बारहमासी प्याऊ संचालित कर रहे हैं। यहां राहगीरों को निशुल्क शीतल जल और गर्मी के दिनों में ठंडी छाछ उपलब्ध करवाई जाती है।

इस प्याऊ की खास बात केवल पानी की व्यवस्था नहीं, बल्कि यहां मिलने वाला सुकून और अपनापन है। राहगीरों के बैठने के लिए बैंच, गर्मी से बचाव के लिए छायादार टेंट, मधुर संगीत और बच्चों के लिए झूले भी लगाए गए हैं। यही वजह है कि यह स्थान राहगीरों के लिए राहत का केंद्र बन चुका है।

प्रमुख तिराहे पर यात्रियों को राहत

महाराणा प्रताप तिराहा सुनेल क्षेत्र का प्रमुख मार्ग है, जहां से भवानीमंडी, झालरापाटन सहित कई क्षेत्रों के लिए आवागमन होता है। दिनभर बसों, निजी वाहनों और दुपहिया वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में हजारों राहगीर यहां रुककर पानी और छाछ से राहत महसूस करते हैं।

स्थायी सेवा कार्य का संकल्प

धाकड़ बताते हैं कि माता के निधन के बाद उन्होंने समाज के लिए स्थायी सेवा कार्य करने का संकल्प लिया। एक दिन तिराहे पर लोगों को पानी के लिए परेशान होते देखा तो प्याऊ शुरू करने का निर्णय लिया। तब से लगातार यह सेवा जारी है। उनका कहना है कि राहगीरों के चेहरे पर संतोष देखकर आत्मिक सुख मिलता है।

ठंडी छाछ की व्यवस्था

भीषण गर्मी को देखते हुए प्याऊ पर विशेष रूप से ठंडी छाछ की व्यवस्था भी की गई है। दोपहर के समय बड़ी संख्या में राहगीर यहां रुककर छाछ पीते हैं। गर्मी में शरीर को राहत देने वाली छाछ लोगों को काफी पसंद आ रही है। धाकड़ बताते हैं कि कई बार दूर-दराज से आने वाले मजदूर, किसान और वाहन चालक यहां पहुंचते ही पहले छाछ मांगते हैं। ऐसे में उनकी जरूरत को देखते हुए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में छाछ तैयार करवाई जाती है।

पशु-पक्षियों के लिए भी व्यवस्था

गोविंद धाकड़ ने केवल इंसानों की ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने का भी बीड़ा उठाया है। प्याऊ परिसर में मवेशियों के लिए पानी पीने का पात्र बनवाया गया हैं, जहां दिनभर पशु पानी पीते नजर आते हैं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों के लिए परिंडे भी लगाए गए हैं। गर्मी में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था होने से यहां दिनभर चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है। स्थानीय लोग इसे जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का सुंदर उदाहरण मानते हैं।

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