झाबुआ, Apr 10, 2026

firing over tadvi post former sarpanch killed village tension
MP News: मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम आमलीफलिया में तड़वी ((स्थानीय आदिवासी समुदाय का पारंपरिक मुखिया) पद को लेकर चला वर्चस्व का विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। एक पक्ष द्वारा की गई फायरिंग में पूर्व सरपंच बापू वाखला (57) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन ग्रामीण घायल हो गए। घटना के बाद गांव में तनाव व्याप्त है और एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच पूर्व सरपंच का गांव में अंतिम संस्कार किया गया। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया।
बुधवार शाम करीब 6:30 बजे आमलीफलिया में ‘मान’ कार्यक्रम चल रहा था, जहां पूर्व सरपंच बापू वाखला मौजूद थे। इसी दौरान गांव के दूसरे हिस्से में सगाई समारोह भी आयोजित था। इसी बीच कुछ लोग बंदूक और डंडों के साथ मौके पर पहुंचे और विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपियों ने विवाद के दौरान तड़वी पद को लेकर दावा जताया। इसी बात पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद बढऩे पर एक आरोपी ने बंदूक से सीधे बापू वाखला पर फायर कर दिया। गोली उनके सीने में लगी और वे मौके पर ही गिर पड़े। वहीं छर्रे लगने से तीन अन्य ग्रामीण घायल हो गए। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया। एसडीएम महेश मंडलोई और तहसीलदार सुनील डावर मौके पर पहुंचे। कोतवाली थाना प्रभारी आरसी भास्करे ने ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें शांत कराया और अंतिम संस्कार के लिए राजी किया। दोपहर बाद करीब साढ़े 4 बजे पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्ण अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
पुलिस ने इस मामले में 9 नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या, बलवा सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। इनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। थाना प्रभारी आरसी भास्करे के अनुसार, स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
एक छोटे से विवाद ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। जहां कुछ देर पहले तक कार्यक्रमों में खुशी का माहौल था, वहीं अब हर घर में सन्नाटा और भय का माहौल है। यह घटना एक बार फिर बताती है कि वर्चस्व की लड़ाई जब हिंसा में बदलती है, तो उसकी कीमत पूरे समाज को चुकानी पड़ती है।
Published on: 10 Apr 2026 07:06 pm

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