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UP Police SI Exam: यूपी पुलिस एसआई परीक्षा के प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द पर विवाद, जांच की मांग

UP SI Recruitment 2026 : यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र में ‘पंडित’ शब्द को लेकर विवाद बढ़ गया। बदलापुर विधायक Ramesh Chandra Mishra ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से जांच की मांग की।

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यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्न पर विवाद, बदलापुर विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्न पर विवाद, बदलापुर विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

UP Police SI Exam Paper Controversy: उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जौनपुर जिले के बदलापुर से विधायक Ramesh Chandra Mishra ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

विधायक द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि 14 मार्च 2026 को आयोजित Uttar Pradesh Police Sub-Inspector Recruitment Exam के हिंदी प्रश्न पत्र में एक ऐसा प्रश्न शामिल किया गया, जिसने कई अभ्यर्थियों और समाज के लोगों को असहज कर दिया। इस प्रश्न के कारण परीक्षा की निष्पक्षता और प्रश्न पत्र निर्माण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

प्रश्न को लेकर उठी आपत्ति

विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने अपने पत्र में बताया कि परीक्षा के हिंदी खंड में एक प्रश्न पूछा गया थाकि “अवसर के अनुसार बदल जाने वाले व्यक्ति के लिए एक शब्द क्या होगा?” इस प्रश्न के विकल्पों में ‘पंडित’, ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ जैसे शब्द दिए गए थे। विधायक का कहना है कि इन विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग अनुचित तरीके से किया गया है, क्योंकि भारतीय समाज में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग विद्वान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति के लिए किया जाता है।

उन्होंने कहा कि इस शब्द को ऐसे विकल्पों के साथ रखना, जिनमें नकारात्मक अर्थ भी शामिल हों, समाज के एक वर्ग की भावनाओं को आहत करने वाला है। उनका मानना है कि परीक्षा जैसे गंभीर और जिम्मेदार मंच पर शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।

समाज की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा

विधायक का कहना है कि भारतीय संस्कृति में ‘पंडित’ शब्द केवल एक जाति या समुदाय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह विद्वता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इसे किसी नकारात्मक संदर्भ में जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा कि इस प्रकार का प्रश्न सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है और अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनमें पूछे जाने वाले प्रश्नों का चयन पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री से की जांच की मांग

विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि प्रश्न पत्र तैयार करने वाली समिति ने इस प्रकार का प्रश्न क्यों शामिल किया और इसके पीछे क्या कारण थे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई अधिकारी या विशेषज्ञ दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस घटना के बाद प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। आमतौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र विशेषज्ञों की एक समिति द्वारा तैयार किए जाते हैं, जिनमें विषय विशेषज्ञ और शिक्षा जगत से जुड़े लोग शामिल होते हैं।

इसके बावजूद इस तरह के विवादास्पद प्रश्न का शामिल होना कई लोगों के लिए हैरानी का विषय बन गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्न पत्र तैयार करते समय भाषा, संस्कृति और सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।

अभ्यर्थियों में भी चर्चा

एसआई भर्ती परीक्षा में शामिल हुए कई अभ्यर्थियों के बीच भी इस प्रश्न को लेकर चर्चा हो रही है। कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में ऐसे प्रश्नों से अनावश्यक विवाद खड़े हो सकते हैं और इससे परीक्षा का माहौल भी प्रभावित होता है।

हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यह केवल एक भाषाई प्रश्न था और इसे लेकर विवाद नहीं होना चाहिए। लेकिन विधायक की ओर से मामला उठाए जाने के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।

भविष्य के लिए सावधानी की जरूरत

विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने अपने पत्र में यह भी सुझाव दिया है कि भविष्य में प्रश्न पत्र तैयार करते समय सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी शब्द या उदाहरण का चयन करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उससे किसी भी वर्ग की भावनाएं आहत न हों। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया में अतिरिक्त स्तर पर जांच और समीक्षा की व्यवस्था की जाए तो इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सकता है।

सरकार के रुख पर सबकी नजर

अब इस मामले में सरकार और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है। यदि जांच के आदेश दिए जाते हैं तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कहां चूक हुई। फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थी तथा आम लोग भी इस पर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। विधायक द्वारा उठाया गया यह मुद्दा प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और संवेदनशीलता के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है।