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Jashpur Tamta Mela: महाभारत काल के बकासुर राक्षस और भीम से जुड़ा है इतिहास, बहुत खास है तमता केशलापाठ मेला, जानिए

Jashpur Tamta Mela: पुरानी किंवदंतियों के अनुसार, आदिकाल में पांडव भीम ने गांव के लोगों को असुरों के आतंक से मुक्त कराने के लिए यहां बंकासुर नामक राक्षस का वध किया था।

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सैकड़ों श्रद्धालुओं ने किए केशलापाठ देवता के दर्शन (फोटो सोर्स- पत्रिका)

सैकड़ों श्रद्धालुओं ने किए केशलापाठ देवता के दर्शन (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Jashpur Tamta Mela: यहां के नजदीक ग्राम तमता में आयोजित तीन दिवसीय मेले में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचकर पहाड़ पर स्थित केशलापाठ देवता के दर्शन कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहार छेरछेरा के दिन से शुरू होने वाले इस मेले में आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी लोग पहुंचकर केशलापाठ देवता एवं भोलेनाथ के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

रविवार को क्षेत्रीय विधायक गोमती साय भी केशलापाठ देवता के दर्शन के लिए पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने केशलापाठ देवता एवं भोलेनाथ के दर्शन कर प्रदेश और विधानसभा क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। उनके अलावा जिला पंचायत सदस्य सालिक साय, जिला कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं जिला प्रशासन के अधिकारी भी केशलापाठ देवता के दर्शन कर चुके हैं। बताया जाता है कि यह परंपरा यहां पिछले कई दशकों से निरंतर चली आ रही है। छेरछेरा पर्व के अवसर पर तमता पहाड़ पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। तीन दिनों तक चलने वाला यह तमता मेला मंगलवार को संपन्न हुआ।

कुंड में 12 माह रहता है पानी

पुरानी किंवदंतियों के अनुसार, आदिकाल में पांडव भीम ने गांव के लोगों को असुरों के आतंक से मुक्त कराने के लिए यहां बंकासुर नामक राक्षस का वध किया था। तमता निवासी विशाल अग्रवाल ने बताया कि केशलापाठ पहाड़ पर शिव-पार्वती का प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर के समीप ही एक कुंड है, जिसमें वर्ष भर पानी भरा रहता है।

इस कुंड के जल से श्रद्धालु स्वयं को शुद्ध करने के बाद मंदिर में देवी-देवताओं के दर्शन करते हैं। ग्राम बैगा से मिली जानकारी के अनुसार, लोग यहां अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं और मन्नत पूरी होने पर पुनः यहां आकर नारियल का प्रसाद चढ़ाते हैं। केशलापाठ देवता के दर्शन के लिए इस वर्ष हजारों श्रद्धालु तमता पहुंचे।

365 सीढ़ियों की चढ़ाई

जशपुर में जंगल की गोद में बसा तमता केशलापाठ पहाड़ की ऊंचाई लगभग 400 फीट है और यहां 365 सीढ़ियां बनाई गई हैं। इस जगह की खासियत यह है कि यहां प्रतिदिन बैगा जनजाति के लोग नारियल फोड़कर प्रसाद बांटते हैं और भक्तों का आना-जाना दिनभर लगा रहता है। जशपुर जिले के लोगों के लिए यह मेला एक बड़ा त्योहार माना जाता है। हर साल जनवरी महीने की पौष पूर्णिमा के दूसरे दिन से इस मेले का आयोजन होता है। मेला न केवल क्षेत्रीय लोगों, बल्कि अन्य राज्यों से भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

महाभारत के साथ इतिहास

तमता केसलापाठ पहाड़ के तार महाभारत काल से जुड़े हुए हैं। मान्यता के मुताबिक पाण्डवों ने अपने वनवास काल का कुछ समय यहां बिताया था। केसला पहाड़ पर बकासुर राक्षस ने अपना ठिकाना बना रखा था। यहां के पास के गांव वाले मिलकर प्रतिमाह राक्षस को चार गाड़ी भर खाना, मदिरा और मवेशी भेजते थे।

साथ ही, बारी बारी से गांव के प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को भी उसका आहार बनने के लिए भेजा जाता था। एक दिन माता कुंती रानी ने अपने पुत्र भीम को वहां भेजने का प्रस्ताव रखा। भीम ने केसलापाठ पहाड़ पर बकासुर के साथ घमासान युद्ध किया और बकासुर का अंत कर दिया। बकासुर के वध होने के खुशी में प्रत्येक वर्ष इस मेले का आयोजन किया जाता है।

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