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पोकरण: गर्मी का बढऩे लगा असर, प्रवासी पक्षियों की होगी वापसी

सर्द ऋतु की दस्तक के साथ विदेश से आने वाले मेहमान की 5 माह बाद पुन: वतन वापसी फरवरी के अंतिम सप्ताह व मार्च के शुरुआती दिनों में शुरू हो जाएगी। गर्मी की दस्तक के साथ अब वतन वापसी की तैयारी शुरू होने वाली है।

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सर्द ऋतु की दस्तक के साथ विदेश से आने वाले मेहमान की 5 माह बाद पुन: वतन वापसी फरवरी के अंतिम सप्ताह व मार्च के शुरुआती दिनों में शुरू हो जाएगी। गर्मी की दस्तक के साथ अब वतन वापसी की तैयारी शुरू होने वाली है। गत 5 माह से भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे सरहदी जिले के तालाबों, जलस्त्रोतों व आसपास क्षेत्र पर कुरजां के झुंड नजर आ रहे है और सुबह कुरजां के कलरव से वातावरण गूंज रहा है।

मध्य एशिया के चीन, कजाकिस्तान के साथ साइबेरिया, ब्लैक समुंद्र से लेकर मंगोलिया तक फैले प्रदेश से प्रतिवर्ष हजारों कुरजां पश्चिमी राजस्थान में प्रवास करती है। हिमालय की ऊंचाइयों को पार करते हुए अक्टूबर माह में आने वाली कुरजां फरवरी माह तक यहां ठहरती है और फरवरी के अंतिम सप्ताह में इनकी रवानगी शुरू होती है एवं मार्च माह के पहले पखवाड़े तक सभी कुरजां वतन वापसी कर देती है।

सरहदी जिले के एक दर्जन से अधिक स्थलों पर कुरजां अपना पड़ाव डालती है। पोकरण क्षेत्र के रामदेवरा, खेतोलाई, चाचा, सोढ़ाकोर के तालाबों, गुड्डी गांव में स्थित रिण, भणियाणा तालाब पर इनका डेरा रहता है। इस वर्ष फरवरी माह के पहले पखवाड़े में ही गर्मी का दौर शुरू हो चुका है और तापमान बढऩे लगा है। ऐसे में कुरजां भी फरवरी के अंतिम या मार्च माह के पहले सप्ताह तक रवानगी शुरू कर सकती है।

खींचन में पर्याप्त व्यवस्थाएं, जिले में नहीं

पश्चिमी राजस्थान के फलोदी जिले के खींचन में सर्वाधिक कुरजां पड़ाव डालती है। यहां कुरजां के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई है। उनके लिए स्वच्छ पानी, चुग्गे के साथ ही सुरक्षा को लेकर भी इंतजाम है। हालांकि रामदेवरा के पास गत वर्ष सर्वाधिक कुरजां ने पड़ाव डाला था, लेकिन इस वर्ष अन्य जलस्त्रोतों पर भी अच्छी संख्या नजर आई। जिले के करीब एक दर्जन जलस्त्रोतों पर कुरजां के दलों को देखा गया।

गर्मी बढऩे पर करेगी प्रस्थान

सितंबर माह में मध्य एशिया में बर्फबारी शुरू हो जाती है। ऐसे में भोजन की तलाश में कुरजां प्रतिवर्ष भारत व विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान का रुख करती है। यहां उन्हें पर्याप्त भोजन मिल जाता है। प्रवासी कुरजां पक्षी की आवक सितंबर माह अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाती है और अक्टूबर माह तक बड़ी संख्या में कुरजां जैसलमेर जिले में पड़ाव डालती है। यहां करीब 5 माह तक इनका ठहराव होता है। फरवरी माह में धीरे-धीरे तापमान बढऩे लगता है और मार्च माह में गर्मी की दस्तक होने तक कुरजां वापिस रवाना हो जाती है। इस वर्ष फरवरी माह के पहले पखवाड़े में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। ऐसे में फरवरी के अंतिम या मार्च माह के पहले सप्ताह में ही कुरजां के रवाना होने की संभावना है।

कुरजां की विशेषताएं

  • पश्चिमी राजस्थान के मेहमान माने जाने वाले प्रवासी पक्षी कुरजां का वजन दो से ढाई किलो का होता है।
  • कुरजां पानी के आसपास खुले मैदान व समतल जमीन पर ही अपना अस्थायी डेरा डालकर रहते है।
  • इन पक्षियों का मुख्य भोजन मोतिया घास होती है। पानी के पास पैदा होने वाले कीड़े-मकौड़े खाकर कुरजां अपना पेट भरती है।
  • अच्छी बारिश के दौरान होने वाली मतीरे की फसल भी कुरजां का पसंदीदा भोजन है।

फैक्ट फाइल:-

  • 10 हजार के करीब कुरजां ने किया सरहदी जिले का रुख
  • 5 माह से जलस्त्रोतों पर डाल रखा है पड़ाव
  • 1 दर्जन जलस्त्रोतों पर गूंज रहा कलरव