
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में देशों के बीच चल रहे सशस्त्र संघर्ष के बीच हवाई खतरों से निपटने की अपनी ताकत को परखने के लिए अभ्यास किया है। इसमें सेना की दक्षिणी कमान की एयर डिफेंस ब्रिगेड ने हाई-इंटेंसिटी फायरिंग अभ्यास किया।
जिसमें आधुनिक रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से ड्रोन टारगेट्स को नष्ट किया गया। रेंज में आयोजित अभ्यास के दौरान यह दिखाया गया कि अगर दुश्मन के ड्रोन भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसने की कोशिश करते हैं तो उनका क्या अंजाम होता है। इसमें ड्रोन के नजर आते ही एयर डिफेंस यूनिट्स ने पहले उन्हें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जाम किया और फिर एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से सटीक निशाना लगाकर उन्हें आसमान में नष्ट कर दिया।
सेना ने आधुनिक तकनीक के सटीक इस्तेमाल का प्रदर्शन करते हुए उन्नत रडार सिस्टम से काफी दूरी से ड्रोन की लोकेशन ट्रैक की, वहीं कंट्रोल रूम में मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों ने हाई-टेक कंप्यूटर कंसोल के जरिए लक्ष्य की पहचान की। उनकी ओर से दिए गए सटीक कमांड के जरिए मिसाइल और गनों से लक्ष्य को भेद दिया गया। सेना की यह मारक क्षमता लगभग 3.5 से 4 किलोमीटर तक है, जहां यह ड्रोन्स, हेलीकॉप्टरों और कम ऊंचाई पर उडऩे वाले विमानों को सटीक निशाना बना सकती है।
अभ्यास में सेना की एयर डिफेंस की कई उन्नत प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया। सेना ने एल-70 जैसी उन्नत विमानभेदी गनों का इस्तेमाल किया। ये गन लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन जैसे लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम हैं। रडार से जुडऩे के कारण ये रात में भी सटीक निशाना लगा सकती हैं। यह विमानभेदी गन भारतीय सेना की एयर डिफेंस का अहम हिस्सा है। यह गन मूल रूप से स्वीडन की कंपनी बोफोर्स द्वारा विकसित की गई थी, जिसे भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया है।
Published on:
10 Mar 2026 08:09 pm
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