जैसलमेर, Jun 04, 2026

पोकरण. बदहाल पड़ा सुभाष पार्क। पत्रिका
पोकरण क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्थिति निराशाजनक बनी हुईं है। पत्रिका की ओर से की गई पड़ताल में दावों से हकीकत जुदा दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि रेगिस्तानी और सरहदी जिले के प्रवेश द्वार परमाणु नगरी पोकरण में पर्यावरण स्वास्थ्य के हालात चिंताजनक है। जिसके कारण हरियाली का ग्राफ लगातार कम हो रहा है। कहने को प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में पौधे लगाए जा रहे है, लेकिन उनकी सार- संभाल नहीं होने और समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण पौधे पनप नहीं पा रहे है। गत वर्ष नगरपालिका की ओर से वृहद स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया गया। जिसके अंतर्गत 4 से 5 हजार पौधे लगाए गए थे, लेकिन अधिकांश पौधे बारिश की कमी तो कई पौधे सारसंभाल के अभाव में जलकर नष्ट हो गए। केवल 20 से 25 प्रतिशत पौधे ही विकसित हो सके है।
कस्बे में सबसे बड़ा व मुख्य सालमसागर तालाब स्थित है। तालाब में सीवरेज लाइन छोड़ रखी है। जिसके कारण बारिश के दौरान जमा होने वाला पानी दूषित हो रहा है। यहां तक कि पानी का रंग ही बदल चुका है। इसकेे अलावा तालाब पर समय पर सफाई भी नहीं हो रही है। जिसके कारण घाटों एवं आसपास क्षेत्र में कचरे व गंदगी के ढेर लगे है।
कस्बे में कचरा प्रबंधन पूरी तरह से कागजों में ही हो रहा है। कस्बे के गली मोहल्लों से संग्रहित कचरा फलसूंड रोड पर खुले में डाला जा रहा है। जिससे यहां ढेर लगे पड़े है और गंदगी फैल रही है। ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की ओर से प्रदेश स्तरीय ठेका दिया गया, लेकिन ठेकेदार कभी पोकरण पहुंचा ही नहीं है। जिसके कारण कचरे का निस्तारण नहीं हो रहा है।
सरकार की ओर से प्लास्टिक व सिंगल यूज प्लास्टिक को प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन कस्बे में खुलेआम उपयोग, विक्रय व भंडारण हो रहा है। नगरपालिका की ओर से वृहद स्तर पर अभियान चलाकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यदा-कदा उच्चाधिकारियों के निर्देश या सरकार के फरमान पर नाममात्र की प्लास्टिक जब्त करने की कार्रवाई कर इतिश्री कर दी जाती है। जिसके कारण प्लास्टिक का कचरा बिखरा पड़ा है और पशु इनका सेवन कर रहे है। जिससे उनके स्वास्थ्य बिगडऩे की आशंका है।
कस्बे में एक भी विकसित उद्यान नहीं है। नेहरु बालोद्यान, व्यास पार्क और सुभाष पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे है। दो वर्ष पूर्व रामदेवरा रोड पर उद्यान विकसित करने की पहल शुरू की गई, वह भी अधूरी पड़ी है। सालमसागर तालाब के पास हनुमान वाटिका विकसित है, लेकिन यहां पर्याप्त जगह नहीं है।
गत वर्ष 4 से 5 हजार पौधे लगाकर उनकी जियो टैगिंग की गई थी। उन्हें समय पर पानी पिलाने की व्यवस्था की गई थी। बारिश की कमी और भीषण गर्मी के कारण कई पौधे जल गए। तालाबों के सौंदर्यकरण व जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। ठोस कचरा संग्रहण को लेकर सरकार की ओर से राज्य स्तरीय ठेका दिया गया, लेकिन ठेकेदार नहीं आया। जिस पर कई बार पत्र लिखकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
- झब्बरसिंह चौहान, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका, पोकरण
Published on: 04 Jun 2026 08:15 pm

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