
चौपाल पर चुनावी चर्चा करते ग्रामीण। फोटो: पत्रिका
Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदेश में मार्च के पहले सप्ताह में कभी भी चुनावों का बिगुल बज सकता है।
चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी मानी जा रही हैं और जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं।
जानकारी के अनुसार, 25 फरवरी को पंचायती राज से जुड़े चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा।
माना जा रहा है कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद मार्च के प्रथम सप्ताह में प्रदेश में चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का लगातार रुख स्पष्ट है कि पंचायत और निकाय चुनाव समय पर कराए जाएं। इसी के तहत चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।
अनुमान है कि 25 फरवरी को पंचायती राज से जुड़ी मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के 10 दिन के भीतर आचार संहिता लागू हो जाएगी।
इस हिसाब से मार्च के प्रथम सप्ताह में आचार संहिता लागू होने की संभावना है। संभव है कि इस बार पंचायत चुनाव की आचार संहिता 60 दिन की बजाय 45 दिन या 30 दिन की भी रखी जाए।
पंचायत के तुरंत बाद निकाय चुनाव भी होने है। इसी लिहाज से निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियां तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए है।
प्रदेश में पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही गांवों में सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। संभावित उम्मीदवारों ने भी अपनी सक्रियता तेज कर दी है।
गांव-गांव चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई हैं। युवा प्रत्याशी सोशल मीडिया के जरिए तो अनुभवी नेता पारंपरिक जनसंपर्क से चुनाव प्रचार को तरजीह दे रहे हैं।
गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में दीवारों पर पोस्टर और बैनर नजर आने लगे हैं। कई स्थानों पर होर्डिंग्स के जरिए विकास के वादे और व्यक्तिगत छवि को उभारा जा रहा है।
स्थानीय मुद्दे जैसे पेयजल, सड़क, सफाई, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ जैसे वादे उम्मीदवार कर रहे हैं। कुल मिलाकर पंचायत चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंचती दिख रही है।
Updated on:
16 Feb 2026 05:43 pm
Published on:
16 Feb 2026 04:47 pm
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