30 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जयपुर, Apr 13, 2026

Rail Project: राजस्थान में 10,000 करोड़ रुपए की लागत से 827 किमी नई रेल लाइन का काम शुरू, प्रदेश के कोने-कोने पहुंचेगी ट्रेन

Rail Project: राजस्थान में सरहदी इलाकों को मजबूत रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना ने रफ्तार पकड़ ली है। करीब 827 किलोमीटर लंबा नया रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना पर काम तेज हो गया है। इस प्रोजेक्ट पर 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

Rajasthan Rail Project

रेल प्रोजेक्ट फोटो- एआई जेनरेटेड

जयपुर। पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के सरहदी इलाकों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। करीब 827 किलोमीटर लंबा नया रेलवे कॉरिडोर विकसित करने की योजना ने अब रफ्तार पकड़ ली है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है। यह रेल नेटवर्क न केवल सीमावर्ती गांवों को मुख्यधारा से जोड़ेगा, बल्कि देश की सामरिक क्षमता को भी नई मजबूती देगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस कॉरिडोर के तहत कई अहम रेल लाइनों पर काम चल रहा है। जैसलमेर से भीलड़ी (बाड़मेर होते हुए) करीब 380 किलोमीटर और जैसलमेर से खाजूवाला के बीच 260 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पश्चिमी भूभाग रेलवे से जुड़ेगा

वहीं अनूपगढ़ से बीकानेर के बीच 187 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है, जिस पर करीब 2277 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पश्चिमी राजस्थान का बड़ा भूभाग सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा।

देश की सेना के लिए महत्वपूर्ण

दरअसल, यह परियोजना सिर्फ कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की सुरक्षा से भी है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल लाइन बिछने से सेना की आवाजाही तेज और सुगम हो जाएगी। आपात स्थिति या युद्ध जैसी परिस्थितियों में जवानों और सैन्य संसाधनों की त्वरित तैनाती संभव हो सकेगी। पहले जहां इन इलाकों में सड़क मार्ग ही मुख्य साधन था, वहीं अब रेल सुविधा मिलने से रणनीतिक दृष्टि से बड़ा बदलाव आएगा।

सरहद से सटे गांवों तक पहुंचेगी ट्रेन

इसके साथ ही यह रेल कॉरिडोर स्थानीय विकास का भी नया द्वार खोलेगा। सरहद से लगे गांव, जो अब तक विकास की मुख्यधारा से दूर थे, उन्हें व्यापार, रोजगार और आवागमन की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कृषि उत्पादों की आवाजाही आसान होगी और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

सीमावर्ती स्टेशनों का हो रहा कायाकल्प

इसी के समानांतर सीमावर्ती रेलवे स्टेशनों का भी कायाकल्प किया जा रहा है। अनूपगढ़, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, सूरतगढ़ और श्रीगंगानगर जैसे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। बाड़मेर और जैसलमेर स्टेशन तो अत्याधुनिक रूप में तैयार भी हो चुके हैं।

रेल अधिकारी ने क्या कहा-

'एक प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार हो गई है, जबकि अन्य दो प्रोजेक्ट का सर्वे चल रहा है। यह प्रोजेक्ट केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सीमावर्ती जिलों के विकास को भी नई गति मिलेगी।' -अमित सुदर्शन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे

कमेंट्स

कोई कमेंट नहीं है।

पहले कमेंट करने वाले बनें।

कृपया पक्का करें कि आपका कमेंट हमारे नियमों एवं शर्तों के मुताबिक हो।
ट्रेंडिंग वीडियो

संबंधित खबरें