
जयपुर। राजस्थान में स्टेट हाइवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए काम की खबर है। प्रदेश की उप-मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार के नियंत्रण वाले टोल प्लाजा ( State Toll Plaza ) के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों को अब टोल की चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इन लोगों के लिए रियायती मासिक पास ( Discounted Monthly Pass ) का प्रावधान सुनिश्चित किया है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने उन चर्चाओं पर भी विराम लगा दिया है जिनमें निजी वाहनों को पूरी तरह टोल मुक्त करने की बात कही जा रही थी।
दिया कुमारी ने सदन को अवगत कराया कि जो ग्रामीण या शहरी निवासी किसी स्टेट टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं, वे एक निर्धारित रियायती शुल्क देकर अपना मासिक पास बनवा सकते हैं।
किसे मिलेगा लाभ - यह सुविधा केवल उन लोगों के लिए है जिनके वाहन का रजिस्ट्रेशन उसी क्षेत्र के पते पर है।
कैसे बनेगा पास - स्थानीय निवासी अपने आधार कार्ड और वाहन के आरसी (RC) के साथ नजदीकी टोल ऑफिस में आवेदन कर सकते हैं।
विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उप-मुख्यमंत्री ने प्रदेश में टोल संग्रहण का पूरा खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे के अलावा राज्य की कुल 83 सड़कों पर वर्तमान में टोल वसूला जा रहा है। इनका प्रबंधन अलग-अलग एजेंसियां कर रही हैं :
राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण: 27 सड़कों पर।
आरएसआरडीसी (RSRDC): 39 सड़कों पर।
रिडकोर (RIDCOR): 13 सड़कों पर।
PWD (सार्वजनिक निर्माण विभाग): 4 सड़कों पर।
काफी समय से मांग उठ रही थी कि राजस्थान में निजी वाहनों (नॉन-ट्रांसपोर्ट) को स्टेट टोल से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाए। विधायक विक्रम बंशीवाल के पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए दिया कुमारी ने कहा, "वर्तमान में हल्के मोटर वाहनों (निजी कारों) को पूरी तरह टोल मुक्त करने का कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।"
उन्होंने याद दिलाया कि 14 मई 2018 को तत्कालीन भाजपा सरकार ने निजी वाहनों को टोल मुक्त किया था, लेकिन अक्टूबर 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नीतिगत निर्णय लेते हुए इस आदेश को निरस्त कर दिया था। वर्तमान सरकार अभी उसी व्यवस्था को जारी रखे हुए है।
अक्सर देखा जाता है कि स्थानीय लोगों को अपने रोजमर्रा के काम के लिए दिन में कई बार टोल प्लाजा से गुजरना पड़ता है। ऐसे में हर बार पूरा टोल देना उनकी जेब पर भारी पड़ता है। 20 किलोमीटर के दायरे वाली यह योजना उन किसानों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए संजीवनी है जो रोजाना इन रास्तों का उपयोग करते हैं।
दिया कुमारी ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का फोकस सड़कों के सुदृढ़ीकरण और टोल वसूली में पारदर्शिता लाने पर है। टोल से मिलने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा सड़कों के रखरखाव और नए पुलों के निर्माण में खर्च किया जाता है। हाल ही में बजट में सड़कों के लिए की गई भारी-भरकम घोषणाओं को देखते हुए टोल संग्रहण को सुचारू रखना सरकार की वित्तीय मजबूरी भी है।
Published on:
13 Feb 2026 09:51 am
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