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‘BJP के बजट में छोरा, गहलोत के राज में हुई छोरी’, बीजेपी MLA ने बजट को ‘जवानी’ और ‘बुढ़ापा’ बताकर लिंगभेद तुलना की

बीजेपी विधायक बहादुर सिंह कोली ने बजट चर्चा के दौरान भाजपा सरकार के बजट को “छोरा पैदा हुआ” और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल के बजट को “छोरी” बताते हुए तुलना की। भाजपा बजट को ‘जवानी’ और कांग्रेस बजट को ‘बुढ़ापा’ कहने पर सदन में हंसी गूंजी।

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जयपुर

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Arvind Rao

Feb 17, 2026

BJP MLA Bahadur Singh Koli

BJP MLA Bahadur Singh Koli (Patrika Photo)

जयपुर: विधानसभा में बजट पर बहस के दौरान भाजपा सदस्य बहादुर सिंह कोली ने सोमवार को बजट तुलना के नाम पर सदन में लिंगभेद से जुड़ी टिप्पणी की, जिससे सदन में हंसी सुनाई दी। वहीं, सियासी हलकों में विवाद खड़ा हो गया। उधर, जनसंगठन विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा के अध्यक्ष से बहादुर सिंह पर कार्रवाई की मांग करते हुए मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं।

बजट पर चर्चा के दौरान बहादुर सिंह ने भाजपा सरकार के बजट को 'जवानी का बजट' और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के बजट को 'बुढ़ापे का बजट' बताते हुए उसकी तुलना लड़का-लड़की पैदा होने से की। बहादुर सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार के पहले, दूसरे और तीसरे बजट में छोरा (लड़का) पैदा हुआ, जिसका सब ने स्वागत किया।

उन्होंने यहां तक कहा कि जवानी में जो छोरा पैदा करता है, वही हमेशा काम आता है। वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल के अंतिम बजट में घोषणा की तो छोरी (लड़की) पैदा हुई, छोरा पैदा नहीं हुआ, इसलिए आप (कांग्रेस) विपक्ष में बैठे हो।

टोकने के बजाय हंसते नजर आए सदस्य

हैरान करने वाली बात यह रही कि कोली की इस टिप्पणी पर सदन में मौजूद कई भाजपा सदस्य उन्हें टोकने की बजाय हंसते नजर आए। सभापति ने भी आपत्ति नहीं की। कुछ कांग्रेसी सदस्यों ने आपत्ति की, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया।

संवैधानिक संस्था की गरिमा गिराई, यह बर्दाश्त नहीं

जनसंगठनों की ओर से पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने बहादुर सिंह के कथन को संवैधानिक संस्था की गरिमा गिराने वाला बताते हुए कहा कि लिंगभेद वाली टिप्पणी के विरोध में जन दबाव तो बनाया ही जाएगा।

इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। भाजपा को पहले कार्रवाई करनी चाहिए। पार्टी भी संविधान के तहत बनी है, वह भी संविधान के फ्रेमवर्क को मानने के लिए बाध्य है, यदि पार्टी कार्रवाई नहीं करती है तो यह माना जाना चाहिए कि उसकी भी यही मानसिकता है।

विधायक संविधान की शपथ से बंधा होता है और सदन में की गई लिंगभेद से जुडी टिप्पणी पुत्र की चाह और लड़की के प्रति नकारात्मक मानसिकता को दर्शाती है। विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा को पत्र लिखकर बहादुर सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। इसके अलावा विधानसभा को विधायकों की मर्यादा सुनिश्चित करने के लिए शब्दावली जारी करनी चाहिए, जिससे कोई विधायक जेंडर विरोधी बात नहीं कह सके।