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Makar Sankranti : बाघ पर सवार होकर आई मकर संक्रांति, शाम से चलेगा दान-पुण्य का दौर

आज मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है और यह हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है, जिससे दिन लंबा होने लगता है और रात छोटी होती है।

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जयपुर

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Murari

Jan 14, 2026

- देश-दुनिया में रहेगी अराजकता का माहौल

- कई देशों के बीच बनेंगे युद्ध के हालात

जयपुर। आज मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है और यह हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है, जिससे दिन लंबा होने लगता है और रात छोटी होती है। इसके साथ ही यह कृषि से जुड़ा पर्व भी है, जो खासतौर पर किसानों के लिए एक नया आरंभ लेकर आता है।

मकर संक्रांति के दिन को लेकर धार्मिक परंपराओं में विशेष विश्वास है। यह दिन पुण्य और शुभ कार्यों के लिए आदर्श माना जाता है। संक्रांति के दिन दान, स्नान और पूजा का विशेष महत्व होता है। वहीं, मकर संक्रांति पर शुभाशुभ फल का निर्धारण भी ज्योतिषशास्त्र के आधार पर होता है।

राजस्थान में मकर संक्रांति के प्रवेश से पूरे वर्ष के शुभाशुभ फल जानने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। माघ कृष्ण एकादशी बुधवार यानि आज सूर्य नारायण दोपहर 3:07 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। देश में कई स्थानों पर मकर संक्रांति का पर्व कल यानि 15 जनवरी को भी मनाया जाएगा। इसी दिन एक माह से चले आ रहे मलमास व खरमास का भी समापन होगा। इसी के साथ ही एक माह से बंद पड़े शुभ कार्य भी शुरू हो जाएंगे।

बाघ पर सवार होकर आएंगी मकर संक्रांति

इस वर्ष मकर संक्रांति का आगमन विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश शास्त्री के अनुसार, इस दिन मकर संक्रांति बाघ पर सवार होकर आएगी, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। बाघ का प्रतीक मकर संक्रांति के साथ जुड़ने से शक्ति, निर्णय लेने की क्षमता और संकटों से उबरने की क्षमता में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। मकर संक्रांति का उपवाहनघोड़ा है। साथ ही हाथ में गदा लिए हैं व शस्त्र लेकर चांदी के पात्र में खीर का भोजन कर रही हैं। इस कारण वर्ष 2026 में बहुत सी परेशानियां आएंगी। देश-विदेश में युद्ध के हालात बनेंगे। अराजकता, सत्ता परिवर्तन, राष्ट्राध्यक्षों की तानाशाही बढ़ेगी। महंगाई भी बढ़ेगी, हालांकि दैनिक उपयोग की वस्तुएं सस्ती रहेंगी। प्राकृतिक आपदाएं भी बहुत आएंगी।

तिल, गुड़ और तेल का करें दान

पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया, इस दिन तिल, गुड़, तेल, कम्बल, नमक, काला वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। नहाते समय भी जल में गंगाजल व तिल डालें। इनके अलावा सूर्य नमस्कार व गायत्री का जप करें। गायों की सेवा करें और गाय को हरा चारा, गुड़ व दलिया खिलाना चाहिए।


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