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सिकुड़ रही चौड़ी सड़कें, जाम-अतिक्रमण में ​पिस रहा जयपुर का मानसरोवर

मानसरोवर की चौड़ी सड़कें अब अतिक्रमण और जाम के बोझ तले कराह रही हैं। कभी 70 से 100 फीट चौड़ी सड़कों के लिए पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र आज अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग और अधूरे विकास कार्यों के बोझ तले कराह रहा है।

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जयपुर

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Ashwani Kumar

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Ashwani Bhadauria

Feb 25, 2026

जयपुर. मानसरोवर की चौड़ी सड़कें अब अतिक्रमण और जाम के बोझ तले कराह रही हैं। कभी 70 से 100 फीट चौड़ी सड़कों के लिए पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र आज अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग और अधूरे विकास कार्यों के बोझ तले कराह रहा है। इलाके की मुख्य सड़कों का हाल यह है कि चौड़ाई कागजों में भले 100 फीट दर्ज हो, लेकिन जमीन पर कई जगह ये 40 से 50 फीट तक सिमट गई हैं। जेडीए और नगर निगम सड़कें बनाते समय पूरी चौड़ाई में निर्माण नहीं करते, बल्कि बची हुई जगह में ही काम पूरा कर देते हैं। ऐसे में अतिक्रमण करने वालों को खुली छूट मिल जाती है।

15 किमी घूमे... कहीं भी नहीं दिखी सुगम राह
राजस्थान पत्रिका रिपोर्टर ने मानसरोवर के मुख्य मार्गों पर 15 किमी तक सफर किया। थड़ी मार्केट से शुरू हुए सफर में मध्यम मार्ग मास्टरप्लान में तो 100 फीट दर्ज है, लेकिन मौके पर 50 फीट भी नजर नहीं आया। कई प्रतिष्ठान सीधे सड़क तक बने हुए मिले। रैम्प और सड़क सीमा क्षेत्र में खड़ी गाड़ियों ने चलने की जगह ही नहीं छोड़ी। विजय पथ पर हाल और भी खराब दिखा, जहां मध्यम से विजय पथ तक सड़क आठ से दस फीट की ही नजर आई, बाकी हिस्से पर पार्किंग का कब्जा था। यही हाल पटेल मार्ग, वरुण पथ और शिप्रा पथ पर भी देखने को मिला। पीक ऑवर्स में स्थिति और बिगड़ जाती है। दोनों ओर बेतरतीब खड़ी गाड़ियों के कारण वाहन रेंगते हुए आगे बढ़ते हैं।

कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता
स्थानीय लोगों का कहना है कि जेडीए और नगर निगम समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाते हैं, लेकिन ये कार्रवाई स्थायी नहीं होती। कुछ दिनों की सख्ती के बाद फिर वही हाल लौट आता है। सड़क किनारे अस्थायी ढांचे और कई जगह पक्के निर्माण खड़े हो चुके हैं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही।

चौराहों के कॉर्नर पर ट्रांसफॉर्मर, बढ़ा जोखिम
जयपुर डिस्कॉम ने कई चौराहों के मोड़ों पर ट्रांसफॉर्मर लगा रखे हैं। इससे दृश्यता कम हो जाती है और सड़क सीमा क्षेत्र में बाधा खड़ी होती है। ये न केवल सुगम राह में रोड़े बन रहे हैं, बल्कि हादसे का भी खतरा बढ़ा रहे हैं।

खुदाई के गड्ढे बने मुसीबत
क्षेत्र में विभिन्न विभागों द्वारा बार-बार सड़क खोदने के बाद मरम्मत अधूरी छोड़ दी जाती है। इन गड्ढों के कारण खासतौर पर दोपहिया वाहन चालक परेशान रहते हैं। बरसात में यही गड्ढे पानी से भरकर और भी खतरनाक हो जाते हैं।

पार्किंग का संकट
सड़कों के दोनों ओर खड़ी गाड़ियां सबसे बड़ी समस्या बन चुकी हैं। बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बाहर पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। नतीजतन वाहन सीधे सड़क पर ही खड़े कर दिए जाते हैं। इससे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है।

कार्रवाई के निर्देश
पूर्व में मध्यम मार्ग और शिप्रा पथ से अतिक्रमण हटाया गया था। कई मार्गों पर विकास कार्य भी जारी हैं। संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़क सीमा में जो अतिक्रमण हैं, उन्हें हटाया जाए। इसके बाद अन्य निर्माण जो सड़क सीमा में मिलेंगे, उन्हें भी ध्वस्त किया जाएगा।— लक्ष्मीकांत कटारा, उपायुक्त, मानसरोवर जोन