10 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आदत सुधार लेंः हल्के में न लो कचरे को…हूपर में अलग-अलग नहीं डाला तो जेब को कर देगा हल्का

जयपुर सहित प्रदेश के अन्य निकायों की कचरा निस्तारण की व्यवस्था पूरी तरह बदलेगी। ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 एक अप्रेल से लागू होंगे। इसके बाद शहरवासियों को अलग-अलग कचरा हूपर में डालना होगा। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम जुर्माना वसूलेगा।

2 min read
Google source verification
Jaipur Nagar Nigam Greater

फोटो: पत्रिका

जयपुर. जयपुर सहित प्रदेश के अन्य निकायों की कचरा निस्तारण की व्यवस्था पूरी तरह बदलेगी। ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 एक अप्रेल से लागू होंगे। इसके बाद शहरवासियों को अलग-अलग कचरा हूपर में डालना होगा। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम जुर्माना वसूलेगा। इसके अलावा राजधानी के बड़े कार्यालयों, रिहायशी समितियों, अस्पताल, होटल और मॉल के लिए नियम और सख्त किए गए हैं। उन्हें अपने परिसर में ही गीले कचरे का निस्तारण करना होगा। इसके लिए खाद बनाने या जैविक प्रक्रिया अपनानी होगी।

यदि परिसर में कचरा निस्तारण संभव नहीं है तो इसके लिए वैकल्पिक प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही कचरा संग्रह से लेकर निस्तारण तक की पूरी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज करनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। जुर्माना राशि राज्य सरकार और स्थानीय निकाय मिलकर तय करेंगे।

खास-खास
-28 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार ने लागू किए हैं नए नियम

इस तरह अलग करना होगा
-गीला कचरा: रसोई और भोजन से जुड़ा कचरा आएगा
-सूखा कचरा: प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच
-सैनेटरी वेस्ट: डायपर और सैनेटरी पैड
-हानिकारक कचरा: इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट, दवाइयों के अवशेष और रसायनयुक्त सामग्री

ये भी होगा
-प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री बनाने वाले उत्पादकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद उपयोग के बाद सही तरीके से एकत्र और पुनर्चक्रित हों।
-सूखे कचरे के लिए पृथक्करण केंद्रों को मान्यता दी जाएगी, जहां पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग किया जाएगा।
-कचरे से ईंधन तैयार कर उद्योगों में उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे डंपिंग साइट पर कचरा कम पहुंचेगा।


पुराने बनाम नए नियम

1- कचरा विभाजन-पुराने नियमों में दो या तीन श्रेणियों में कचरा अलग करने की व्यवस्था थी, लेकिन इसका पालन सख्ती से नहीं कराया गया।
अब: कचरा चार श्रेणियों में अलग-अलग देना अनिवार्य किया गया है। ऐसा नहीं करने पर जुर्माना लिया जाएगा।

2-बड़ी संस्थाओं की जिम्मेदारी
-पहले बड़ी इमारतों और संस्थानों के लिए स्पष्ट दायित्व तय नहीं थे।
अब: बड़े कार्यालय, रिहायशी समितियों, अस्पतालों, होटलों और मॉल को अपने परिसर में ही गीले कचरे का निस्तारण करना होगा।

3-डिजिटल निगरानी
पहले पुराने नियमों में निगरानी मुख्य रूप से मैनुअल व्यवस्था पर आधारित थी।अब: कचरा संग्रहण, परिवहन और निस्तारण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाएगी।

4-कचरा निस्तारण स्थल
पहले डंपिंग स्थलों पर वर्षों से जमा कचरा जस का तस पड़ा रहता था।
अब: पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से हटाकर भूमि को दोबारा उपयोग योग्य बनाया जाएगा।

नियम अच्छे, व्यवस्था भी हो पूरी
नये नियमों में कई प्रावधान अच्छे किए हैं। हालांकि, अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों पर सख्ती भी की जाएगी। जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वहीं, जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। अब तक देखें तो निगम के पास अलग-अलग कचरा लेने की समुचित व्यवस्था ही नहीं है। सबसे पहले निगम को अपने हूपर्स में इस तरह की व्यवस्था करनी चाहिए।
-विवेक एस अग्रवाल, एक्सपर्ट, ठोस कचरा प्रबंधन