
कांग्रेस विधायक रफीक खान-बालमुकुंद आचार्य। फाइल फोटो- पत्रिका
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बजट पेश होने के बाद सियासी पारा अचानक चढ़ गया। अगले ही दिन सदन के बाहर सत्ता और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक ने माहौल को गरमा दिया और बयानबाजी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया।
कांग्रेस विधायक रफीक खान ने जयपुर से जीतकर आए भाजपा विधायकों पर तंज कसते हुए कहा कि बड़े चेहरे विधानसभा तक तो पहुंच गए, लेकिन जयपुर को बजट में खास सौगात नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि शहर को बड़े ऐलान की उम्मीद थी, मगर बजट में मेट्रो का जिक्र तक नहीं है। रफीक ने सरकार के विजन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बजट में ठोस दिशा नजर नहीं आती और राज्य लगातार कर्ज के बोझ में दबता जा रहा है।
इस पर भाजपा विधायक जेठानंद व्यास ने जवाब देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर जोधपुर केंद्रित बजट बनाने के आरोप लगते रहे हैं, जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल पूरे प्रदेश को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार कर रहे हैं। जोधपुर का मुद्दा उठते ही हवामहल से विधायक बालमुकुंद आचार्य ने भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार जोधपुर को भी अपेक्षित विकास नहीं दे सकी और आज भी वहां मांगें अधूरी हैं। उनके बयान से साफ था कि भाजपा विधायक पूर्व सरकार के दावों को चुनौती दे रहे हैं।
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रफीक खान ने अंत में मनरेगा और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मनरेगा योजना को कमजोर नहीं होने देगी। साथ ही दावा किया कि राज्य में एक करोड़ से ज्यादा बेरोजगार हैं और बजट में उनके लिए ठोस रोजगार योजना का अभाव है।
Published on:
12 Feb 2026 03:49 pm
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