
पारदर्शी शहरी नियोजन किसी भी आधुनिक शहर की सफलता की आधारशिला है।
डॉ. रिपुन्जय सिंह - पूर्व सदस्य (राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड),
दुनियाभर में शहरीकरण तीव्र गति से बढ़ रहा है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में शहरों का विस्तार, परिवहन व्यवस्था, आवास, हरित क्षेत्र, कचरा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लिए जाने वाले निर्णय करोड़ों लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। ऐसे में शहरी नियोजन का पारदर्शी होना न केवल प्रशासनिक दक्षता का संकेत है, बल्कि यह नागरिकों और शासन के बीच विश्वास का सेतु बनता है। पारदर्शी शहरी नियोजन किसी भी आधुनिक शहर की सफलता की आधारशिला है।
जब नागरिकों को यह स्पष्ट दिखाई देता है कि उनके शहर में विकास से संबंधित निर्णय खुले, तथ्यपूर्ण और सहभागी तरीके से लिए जाते हैं तो उनके मन में शासन के प्रति भरोसा मजबूत होता है। पारदर्शिता विभिन्न घटकों, सर्वोत्तम प्रथाओं, नागरिक प्रतिक्रियाओं, व्यवहारगत बदलावों, प्रेरक तत्वों, संभावित परिणामों और अपेक्षित उपलब्धियों का विश्लेषण है। इससे पारदर्शी शहरी नियोजन की आवश्यकता में भरोसा निर्माण व नागरिकों की आशंकाएं कम होती हैं और प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ता है।
साझा निर्णय से योजनाएं जमीन से जुड़ी आवश्यकताओं के अनुसार बनती हैं। भ्रष्टाचार में कमी आती है व खुले आंकड़ों और सार्वजनिक चर्चा से अनियमितताएं कम होती हैं। समानता और न्याय संसाधनों का वितरण निष्पक्ष होता है और लाभ सभी वर्गों तक पहुंचता है। नागरिक सहभागिता सार्वजनिक परामर्श, सामुदायिक बैठक, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया आदि के माध्यम से नागरिक अपनी राय व्यक्त करते हैं। जब उनकी राय को योजनाओं में शामिल किया जाता है, तो उन्हें लगता है कि शहर वास्तव में उनका है। आधार सामग्री, समय रेखा और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक होने से प्रशासन व योजनाकारों की जवाबदेही बढ़ती है। लोगों को दिखता है कि सरकार अपने वादों और समयसीमा का पालन कर रही है। इससे विश्वसनीयता बढ़ती है। इससे विवादों और भ्रम की कमी आती है। अक्सर शहरी परियोजनाएं गलतफहमियों और अफवाहों के कारण विवादों में घिर जाती हैं। पारदर्शिता इन भ्रमों को मिटाती है और संवाद की स्थिति निर्मित करती है।
सामुदायिक स्वामित्व में जब लोग यह महसूस करते हैं कि वे शहर के विकास में हिस्सेदार हैं, तो वे योजनाओं को अपना समझते हैं। यह सामाजिक सामंजस्य और विश्वास निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पारदर्शी प्रक्रियाएं भविष्य के लिए एक दीर्घकालिक साझेदारी बनाती हैं। नागरिक, प्रशासन, नगर निकाय, निजी क्षेत्र और सिविल सोसायटी के बीच होती हैं। ऐसे मॉडल से शहर अधिक स्थायी और लचीला बनते हैं। सिंगापुर में एकीकृत मास्टर प्लान, डिजिटल ट्विन तकनीक और ओपन डेटा नागरिकों को साफ समझ देते हैं कि शहर कैसे विकसित हो रहा है। कोपेनहेगन (डेनमार्क) में हर चरण में समुदाय की सहभागिता-साइकिल लेन से लेकर हरित क्षेत्रों तक लोगों का विश्वास बेहद मजबूत है। बार्सिलोना (स्पेन) का स्मार्ट सिटी ओपन डेटा मंच नागरिकों को हर परियोजना की जानकारी देता है। भारतीय शहर इन मॉडलों से सीख सकते हैं, विशेषकर डेटा की खुली उपलब्धता और नागरिकों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता है।
भारत में पारदर्शी शहरी नियोजन की दिशा में 'स्मार्ट सिटी मिशन का एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्रÓ नागरिकों के लिए ऑनलाइन पोर्टल है। भारत में नागरिक-भागीदारी और डेटा की आसान उपलब्धता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। पारदर्शी शहरी नियोजन से होने वाले लाभ से विश्वासपूर्ण समाज का निर्माण, बेहतर शहरी सेवाओं की आपूर्ति, भ्रष्टाचार में कमी, संसाधनों का सही उपयोग, अधिक स्थायी रहने योग्य शहर और नागरिक के लिए अनुकूल एवं समावेशी विकास होता है। पारदर्शिता केवल एक प्रशासनिक मूल्य नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक शक्ति है। यह एक ऐसी शक्ति है, जहां योजनाओं और निर्णय प्रक्रियाओं में जनता को शामिल किया जाता है, जहां डेटा खुला होता है और जहां नीतियां और परियोजनाएं स्पष्ट रूप से प्रस्तुत की जाती हैं। वह शहर मजबूत, भरोसेमंद और स्थायी बनता है।
जब जानकारी खुली होती है, निर्णय स्पष्ट होते हैं और नागरिक योजना प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं, तो शहर सिर्फ संरचनात्मक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी मजबूत बनते हैं। विश्वास, सहयोग व जवाबदेही ये तीन स्तंभ शहरों को भविष्य के लिए अधिक सक्षम और लचीला बनाते हैं।
Published on:
12 Feb 2026 07:14 pm
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