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Board Exams: 10वीं-12वीं स्टूडेंट्स के लिए स्कूलों की अनूठी पहल, एक्सपर्ट ने बताए अच्छे नंबर लाने के टिप्स

Boards Exam Preparation Tips: बोर्ड परीक्षाओं से पहले 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव को देखते हुए स्कूलों और बोर्ड ने विशेष काउंसलिंग सत्र शुरू किए हैं। एक्सपर्ट्स छात्रों को नियमित पढ़ाई, संतुलित दिनचर्या, मेडिटेशन और समय प्रबंधन अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

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CBSE Board Exam

Photo: Patrika

10th-12th Board Exam 2026: जयपुर बोर्ड परीक्षा नजदीक आते ही विद्यार्थियों पर दबाव बढ़ने लगा है। खासतौर पर 10वीं और 12वीं के छात्र अच्छे नंबर लाने की उम्मीद कर रहे है। लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भविष्य की चिंता के बीच मानसिक तनाव उन्हें परेशान कर रहा है।

किताबें सामने होती है, तैयारी भी होती है, लेकिन मन में बैठा डर और घबराहट उन्हें चैन से पढ़ने नहीं देती। कठिन सवालों के जवाब तो टीचर्स से मिल जाते हैं, पर परीक्षा से जुड़ा तनाव बच्चे अक्सर न माता-पिता से साझा कर पाते है और न ही खुलकर शिक्षकों से। सहपाठी भी उसी दबाव में होते हैं। इसी चुपचाप बढ़ते तनाव का असर बच्चों के आत्मविश्वास और प्रदर्शन पर पड़ रहा है।

अब बोर्ड और कई स्कूल मिलकर बच्चों के बोर्ड परीक्षाओं के तनाव को कम करने और छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए विशेष काउंसलिंग सत्र शुरू कर रहे हैं। स्कूल शिक्षकों का कहना है कि छात्र तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण ज्यादा प्रेशर महसूस कर रहे है।

इसी वजह से कई बार अच्छी तैयारी के बावजूद परीक्षा के नाम से ही घबराहट शुरू हो जाती है। गौरतलब है कि सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं जल्द शुरू होने वाली है। एक्सपर्ट बच्चों को राय दे रहे हैं कि रोज सभी विषय पढ़ें, खान-पान और नींद का ध्यान रखें। साथ ही मेडिटेशन और ब्रिदिंग एक्सरसाइज करें। किसी भी विषय में समस्या आने पर टीचर्स और पेरेंट्स से बातचीत करें।

टाइम मैनेजमेंट को लेकर सवाल

एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल शेखर कपूर ने बतया कि काउंसलिंग सत्रों में सबसे ज्यादा सवाल रिवीजन को लेकर आ रहे हैं। कई पेरेंट्स पूछ रहे हैं कि अगर बच्चे का पूरा सिलेबस रिवाइज नहीं हो पाया तो क्या करें।

काउंसलर्स का कहना है कि ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। बच्चों को शॉर्ट नोट्स के जरिए फास्ट रिवीजन करने को कहें और टॉपिक्स को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ाएं। साथ ही माता-पिता बच्चों के साथ कुछ समय बिताएं, प्रेरक बातें करें और पढ़ाई के अलावा सामान्य बातचीत भी करें।