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राजस्थान बजट के बीच दिहाड़ी मजदूरों के लिए बड़ी खबर, हाईकोर्ट ने दे दिया ये आदेश

राजस्थान बजट के बीच हाईकोर्ट ने दिहाड़ी मजदूरों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी की गणना 26 नहीं, पूरे 30 दिन के आधार पर करने का आदेश दिया। बेलदार लक्ष्मण कुमावत केस में मुआवजा बढ़ाया गया और केंद्र-राज्य सरकार को नियम संशोधन के निर्देश दिए।

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जयपुर

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Arvind Rao

Feb 11, 2026

Big Relief for Daily Wage Workers Amid Rajasthan Budget Buzz High Court Issues Major Order

दिहाड़ी मजदूरों के लिए बड़ी खबर (फोटो-एआई)

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के लाखों दिहाड़ी मजदूरों (Daily Wage Earners) के हक में एक ऐसा क्रांतिकारी फैसला सुनाया है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल देगा। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब दिहाड़ी मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी की गणना महीने के 26 दिनों के बजाय पूरे 30 दिनों के आधार पर की जाए।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकल पीठ ने इस फैसले के दौरान बेहद मार्मिक और कड़वी सच्चाई को रेखांकित किया। कोर्ट ने कहा, दिहाड़ी मजदूर को साप्ताहिक अवकाश या पेड लीव (Paid Leave) नहीं मिलती। वह अपनी और परिवार की रोटी कमाने के लिए हर दिन संघर्ष करता है। ऐसे में उसकी आय की गणना केवल 26 कार्य दिवसों के आधार पर करना पूरी तरह अनुचित है।

कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि श्रम कानूनों और फैक्ट्री एक्ट में 26 कार्य दिवस और 4 सवैतनिक अवकाश (Paid Holiday) का नियम उन लोगों के लिए है जो संगठित क्षेत्रों में हैं। लेकिन एक गरीब बेलदार या दैनिक मजदूर के लिए छुट्टी का मतलब उसकी कमाई कटना है।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा फैसला बेलदार लक्ष्मण कुमावत की एक अपील पर आया है। लक्ष्मण कुमावत अगस्त 2020 में एक मोटरसाइकिल दुर्घटना में घायल हो गए थे। ब्यावर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने उनकी आय की गणना महीने में केवल 26 दिन मानकर उनका मुआवजा तय किया था। लक्ष्मण ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कुमावत की आय 30 दिनों के आधार पर गिनी और उनके मुआवजे में 33,040 रुपये की बढ़ोतरी का आदेश दिया।

सरकारों को नियम बदलने का आदेश

अदालत ने केवल एक केस तक ही सीमित न रहकर इसे नीतिगत बदलाव का रूप दे दिया है। कोर्ट ने आदेश की प्रति केंद्र के श्रम मंत्रालय और राजस्थान श्रम विभाग के सचिवों को भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि न्यूनतम मजदूरी भुगतान से संबंधित अधिसूचनाओं और परिपत्रों (Circulars) में तुरंत जरूरी संशोधन किए जाएं, ताकि हर दिहाड़ी मजदूर को इसका लाभ मिल सके।

राजस्थान बजट से जुड़ी सभी ताज़ा अपडेट यहां पढ़े।