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रेलवे ट्रैक्स पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एआई का ‘कवच’ मजबूत: हाथी, शेर-बाघ को बचाने की बड़ी पहल

Train Animal Collision: असम हादसे के बाद बड़ा एक्शन। यह तकनीक डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग पर आधारित है, जो ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए जमीन की कंपन को डिटेक्ट करती है।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Dec 26, 2025

Gajraj AI System: जयपुर. भारतीय रेलवे ने वन्यजीवों, खासकर हाथियों की ट्रेनों से टकराकर होने वाली मौतों को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली को और मजबूत कर दिया है। हाल ही में असम में राजधानी एक्सप्रेस से 7 हाथियों की दर्दनाक मौत के बाद रेल मंत्रालय ने इस दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। अब एआई-पावर्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (आईडीएस) को पूरे देश में विस्तार दिया जा रहा है, जो जंगल और हाथी कॉरिडोर से गुजरने वाली ट्रैक्स पर जानवरों की मौजूदगी का पता लगाकर समय रहते अलर्ट जारी करता है। इसका नाम गजराज दिया गया है।

ऐसे काम करता है 'गजराज' सिस्टम

यह अत्याधुनिक तकनीक डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग (डीएएस) पर आधारित है, जो ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए जमीन की कंपन को डिटेक्ट करती है। हाथी जैसे बड़े जानवरों के चलने से उत्पन्न कंपन को एआई तुरंत पहचान लेता है और 500 मीटर पहले ही लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को रियल-टाइम अलर्ट भेज देता है। इससे ट्रेन की स्पीड कम की जा सकती है या इमरजेंसी ब्रेक लगाए जा सकते हैं।

160 से ज्यादा हाथियों की जान बचाई

पहले से नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) के 141 रूट किलोमीटर पर लागू इस सिस्टम ने शानदार परिणाम दिए हैं, 2025 में ही 160 से ज्यादा हाथियों की जान बचाई गई। अब अतिरिक्त 981 किमी पर टेंडर जारी हो चुके हैं, जिससे कुल कवरेज 1,122 किमी हो जाएगा।

रेल मंत्री ने दी जानकारी

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में लिखित जवाब में कहा कि एनएफ रेलवे पर 141 रूट किलोमीटर में एआई-आधारित आईडीएस पहले से लागू है, जो हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजता है। वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षित ट्रेन परिचालन के लिए एआई-सक्षम आईडीएस का विस्तार उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। असम की हालिया घटना के बाद रेलवे ने तुरंत कदम उठाए।

वन्यजीव बचाने के साथ ट्रेन दुघर्टनाओं पर भी अंकुश

भारत में हर साल औसतन 20 हाथी ट्रेन हादसों में मारे जाते हैं, ज्यादातर पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल जैसे इलाकों में। एआई के अलावा स्पीड लिमिट, साइन बोर्ड, वन विभाग से कोऑर्डिनेशन और अंडरपास जैसे उपाय भी जारी हैं। यह पहल न सिर्फ वन्यजीवों को बचाएगी, बल्कि ट्रेन दुर्घटनाओं को भी रोकेगी, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाएगी और पर्यावरण संरक्षण में मिसाल कायम करेगी। रेलवे का लक्ष्य है कि अप्रेल 2026 तक सभी संवेदनशील जोन कवर हो जाएं।