जयपुर, May 29, 2026

सीएम भजनलाल शर्मा। फाइल फोटो- पत्रिका
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए साफ संदेश दिया है कि भ्रष्टाचारियों को शासन-प्रशासन में किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कड़े तेवर दिखाते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत ढाई साल में एक आईएएस अधिकारी सहित 103 अधिकारियों को निलंबित किया है। वहीं 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है और 11 भ्रष्ट अधिकारियों की आजीवन पेंशन पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा रिश्वत, पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी गई है।
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रिश्वत, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के मामलों में न्यायालय में दोष सिद्ध होने के बाद अधिकारियों को तुरंत सेवा से बाहर किया गया। पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन विकास अधिकारी (सुवाणा, भीलवाड़ा) भरत प्रकाश मेघवाल, तत्कालीन कृषि उप निदेशक (झुंझुनूं) राजेश कुमार नैनावत, तत्कालीन सहायक आयुक्त भरतपुर (वित्त कर) महावीर सिंह आसीवाल, चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम मोहन सिंह चौहान (सीएचसी बिछीवाड़ा, डूंगरपुर), डॉ. मुरलीधर शर्मा (सीएचसी रामगढ़ पचवारा, दौसा) और डॉ. मनोहर लाल (सीएचसी रामगढ़, अलवर) को सेवा से बर्खास्त किया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि आमजन को संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका कहना है कि जो अधिकारी जनता के पैसे का दुरुपयोग करेगा, उसकी न नौकरी बचेगी, न पेंशन और न ही कानून से बचने का कोई रास्ता रहेगा। सरकार ने 11 अधिकारियों को भ्रष्टाचार सहित विभिन्न मामलों में आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन रोककर दंडित किया है। इनमें बनवारी लाल मीणा, आरएएस, तत्कालीन उप सचिव (नगर विकास न्यास, अलवर), डॉ. शिवनारायण यादव, तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्साधिकारी (सीएचसी नीमराणा, अलवर), देवेन्द्र सिंह ढिल्लो, आरएएस, उप सचिव (नगर विकास न्यास, अलवर) और मनोहर लाल सिसोदिया, तत्कालीन विकास अधिकारी (कपासन) शामिल हैं।
इसके साथ ही डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कोठारी, तत्कालीन कनिष्ठ विशेषज्ञ (सीएचसी मांडलगढ़, भीलवाड़ा), डॉ. कल्पना श्रीवास्तव, तत्कालीन चिकित्साधिकारी (गंगरार, चित्तौड़गढ़), नृसिंह रेबारी, तत्कालीन सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी (प्रतापगढ़), सुरेश माथुर, तत्कालीन अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी (जैसलमेर), महेन्द्र सिंह, आरपीएस, तत्कालीन वृत्ताधिकारी (सवाई माधोपुर), डॉ. लक्ष्मण दत्त शर्मा, तत्कालीन चिकित्साधिकारी (निवाई, टोंक) और डॉ. अविनाश कुमार शर्मा, तत्कालीन सहायक निदेशक, पशुधन विकास (बांसवाड़ा) पर भी एक्शन लिया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हाल ही में भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसते हुए एक और बड़ी कार्रवाई की। पीएचईडी की अलवर प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती ने पेयजल के नमूनों की गुणवत्ता जांच में फर्जी रिपोर्ट तैयार की। मुख्यमंत्री ने ऐसे घोर लापरवाह अधिकारी को तत्काल सेवा से बाहर करने का निर्णय लिया। इसी तरह हरिसिंह मीना (तत्कालीन एपीपी, एसीजेएम-4, कोटा) को एसीबी कोर्ट से सजा मिलने के बाद नौकरी से हटा दिया गया।
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Published on: 29 May 2026 04:10 pm


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