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जयपुर, May 28, 2026

DK Shivakumar : राजस्थान में निभाई थी ‘संकटमोचक’ की भूमिका, अब बनने जा रहे कर्नाटक CM, जानें ‘ख़ास’ कनेक्शन

कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार का राजस्थान से है गहरा नाता। गहलोत-पायलट विवाद से लेकर जयपुर दौरों तक, जानें उनका खास कनेक्शन।

DK Shivakumar - File PIC

DK Shivakumar - File PIC

कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय संकटमोचक डीके शिवकुमार अब कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने जा रहे हैं। इस बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच राजस्थान की राजनीति में भी उनकी खूब चर्चा हो रही है। बहुत कम लोग जानते हैं कि कर्नाटक की जमीन से आने वाले डीके शिवकुमार का राजस्थान की लीडरशिप और यहां की सांगठनिक व्यवस्था से बेहद पुराना और मजबूत रिश्ता रहा है। जब-जब राजस्थान कांग्रेस के भीतर कोई बड़ा राजनीतिक गतिरोध पैदा हुआ या आलाकमान को किसी बेहद मजबूत दूत की जरूरत महसूस हुई, तब-तब डीके शिवकुमार का नाम सबसे आगे आया। वे न केवल राजनीतिक मोर्चे पर बल्कि प्रशासनिक और धार्मिक यात्राओं के सिलसिले में भी कई बार राजस्थान आ चुके हैं। आज जब वे अपने राजनीतिक जीवन के सर्वोच्च पद यानी मुख्यमंत्री की शपथ लेने की ओर बढ़ रहे हैं, तो मरुधरा के कांग्रेसी हलकों में उनके पुराने दौरों और फैसलों को याद किया जा रहा है।

गहलोत-पायलट विवाद: बंद कमरे में सीक्रेट मीटिंग

डीके शिवकुमार का राजस्थान से जुड़ा सबसे चर्चित और संवेदनशील दौरा अगस्त 2021 में हुआ था। उस समय राजस्थान कांग्रेस के भीतर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट गुटों के बीच कैबिनेट विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भारी खींचतान चल रही थी। सरकार के भीतर चल रहे इस अंदरूनी तनाव को दूर करने और दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाने के लिए आलाकमान ने डीके शिवकुमार को एक विशेष और अघोषित मिशन पर जयपुर भेजा था।

अगस्त 2021 के उस घटनाक्रम के दौरान डीके शिवकुमार अचानक जयपुर एयरपोर्ट पर उतरे थे। हवाई अड्डे से वे सीधे मुख्यमंत्री आवास (CMR) पहुंचे, जहां उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बंद कमरे में करीब एक घंटे तक मैराथन बैठक की थी। हालांकि, उस समय मीडिया के सामने उन्होंने इस यात्रा को पूरी तरह से एक 'निजी दौरा' बताया था, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक और पार्टी के अंदरूनी सूत्र अच्छी तरह जानते थे कि वे दिल्ली आलाकमान के एक बेहद खास संदेशवाहक के रूप में आए थे, जिसके बाद राज्य में कैबिनेट फेरबदल का रास्ता साफ हुआ था।

सरकारी योजनाओं की खुलकर की थी तारीफ

इसके बाद सितंबर 2023 में जब डीके शिवकुमार कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री का पद संभाल रहे थे, तब वे एक बार फिर राजस्थान के दौरे पर आए। इस यात्रा के दौरान उन्होंने जयपुर में अशोक गहलोत से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की थी। इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच आगामी चुनावी रणनीतियों और राज्यों की जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर व्यापक विचार-विमर्श हुआ था।

जयपुर में मीडिया से बात करते हुए डीके शिवकुमार ने राजस्थान सरकार की तत्कालीन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जमकर सराहना की थी। उन्होंने विशेष रूप से ₹500 में घरेलू गैस सिलेंडर देने की योजना और मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना को देश के लिए अनुकरणीय बताया था। शिवकुमार का मानना था कि इस तरह की सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाएं आम जनता को आर्थिक संबल प्रदान करती हैं और कांग्रेस शासित राज्यों को इन मॉडल्स का अध्ययन करना चाहिए।

कोटा के विकास के हुए थे मुरीद

अपनी सितंबर 2023 की यात्रा के दौरान डीके शिवकुमार केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने राजस्थान के हाड़ौती अंचल के प्रमुख शहर कोटा का भी दौरा किया था। कोटा में बुनियादी ढांचे और शहरी विकास के क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व कार्यों ने उन्हें काफी प्रभावित किया था।

डीके शिवकुमार ने कोटा के विश्वप्रसिद्ध चंबल रिवरफ्रंट और ऑक्सीजन सिटी पार्क का खुद दौरा किया था। उन्होंने कहा था कि नदी के किनारों को इस तरह एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना और शहर के बीचों-बीच एक विशाल ऑक्सीजन पार्क बनाना आधुनिक शहरी नियोजन का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने इस विकास कार्य के लिए स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की पीठ थपथपाई थी।

परिवार के साथ अक्सर आते रहे हैं राजस्थान

राजनीति और पार्टी के सांगठनिक कार्यों से इतर डीके शिवकुमार का राजस्थान के साथ एक गहरा आध्यात्मिक और व्यक्तिगत संबंध भी है। वे अपनी धार्मिक आस्थाओं के लिए जाने जाते हैं और यही कारण है कि वे कई बार अपने परिवार के साथ पूरी तरह से निजी यात्राओं पर राजस्थान के विभिन्न सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर आते रहे हैं।

मरुधरा के प्रसिद्ध शक्तिपीठों, मंदिरों और ऐतिहासिक किलों के प्रति उनका विशेष आकर्षण रहा है। उनके करीबियों के अनुसार, राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता और यहां के लोगों का आतिथ्य सत्कार उन्हें हमेशा आकर्षित करता है। यही वजह है कि व्यस्त राजनीतिक जीवन के बावजूद वे राजस्थान आने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

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