
हैदराबाद में 130 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण (फोटो सोर्स-पत्रिका)
Naxal Surrender: देश में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर केंद्र सरकार की तय समयसीमा अब नजदीक आती जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी दिशा में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। एक ओर जहां कई इलाकों में मुठभेड़ों में नक्सली मारे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
इसी कड़ी में तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में शनिवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां प्रतिबंधित माओवादी संगठन के 130 नक्सलियों और उनके कैडर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में 125 माओवादी छत्तीसगढ़ के, 4 तेलंगाना के और 1 आंध्र प्रदेश का नक्सली शामिल है। इनमें संगठन के कई बड़े पदों पर कार्यरत सदस्य भी शामिल हैं। समर्पण करने वालों में 3 स्टेट कमेटी मेंबर, 10 डिविजनल कमेटी सदस्य, 46 एरिया कमेटी सदस्य और 76 दलम सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं।
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार भी प्रशासन को सौंपे। सौंपे गए हथियारों में एक इंसास LMG राइफल, 31 एके-47 राइफल, 21 इंसास राइफल, 20 एसएलआर राइफल सहित अन्य हथियार शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह हथियार लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में उपयोग किए जा रहे थे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों का स्वागत करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के देश में हिंसक और सशस्त्र आंदोलन किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि जो लोग भटके हुए रास्ते पर चले गए हैं, वे अब लोकतंत्र और शांति के मार्ग पर लौटें।
मुख्यमंत्री ने माओवादी संगठन के शीर्ष नेता गणपति सहित अन्य सक्रिय माओवादियों से भी आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास, सुरक्षा और रोजगार सहित हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी। साथ ही उनके मुद्दों पर बातचीत कर समाधान निकालने की भी कोशिश की जाएगी।
रेवंत रेड्डी ने माओवादियों से “बुलेट की राजनीति छोड़कर बैलेट की राजनीति” में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की सेवा और अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का सबसे बड़ा माध्यम चुनाव और जनतांत्रिक व्यवस्था ही है। मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि माओवादी संगठन के मुख्य नेता गणपति आत्मसमर्पण करते हैं तो उन्हें सरकार की ओर से पूरी सुरक्षा और सम्मानजनक पुनर्वास दिया जाएगा।
गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकारें पिछले कुछ वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान के साथ-साथ विकास कार्यों, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को (Naxal Surrender) बढ़ाने पर भी जोर दे रही हैं। इसी का असर है कि बड़ी संख्या में नक्सली अब हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
Updated on:
07 Mar 2026 05:26 pm
Published on:
07 Mar 2026 05:24 pm
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