
vehicle number प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)
vehicle number plate: मध्यप्रदेश के लाखों वाहन मालिकों के लिए राहत भरी खबर है। मध्यप्रदेश में लंबे समय से लंबित नंबर रिटेंशन सुविधा अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस सुविधा के लागू होने के बाद दोपहिया और चारपहिया वाहन बेचने या स्क्रैप कराने पर भी वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर मालिक के पास सुरक्षित रहेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए मप्र परिवहन विभाग नियमों में संशोधन करने जा रहा है। विभाग ने इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
नंबर रिटेंशन का मतलब है कि वाहन मालिक अपने पुराने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर अपने नाम पर सुरक्षित रख सकेगा, भले ही वह वाहन बेच दिया जाए या स्क्रैप कर दिया जाए। बाद में नया वाहन खरीदने पर वही नंबर फिर से अलॉट कराया जा सकेगा।
फिलहाल व्यवस्था यह है कि वाहन बेचने या स्क्रैप कराने के साथ ही उसका नंबर भी नए मालिक के नाम ट्रांसफर हो जाता है या रद्द हो जाता है।
-वाहन बिकेगा, लेकिन नंबर विक्रेता के नाम सुरक्षित रहेगा।
-नया वाहन खरीदने पर वही नंबर दोबारा लगाया जा सकेगा।
-पसंदीदा और वीआईपी नंबर हमेशा मालिक की पहचान बने रहेंगे।
परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, नंबर रिटेंशन के लिए कुछ शर्तें तय की जा सकती हैं, जैसे…
-वाहन बेचते समय आरटीओ में नंबर रिटेंशन के लिए आवेदन करना होगा
-तय समय सीमा (जैसे 6 माह या 1 वर्ष) में नए वाहन पर नंबर ट्रांसफर कराना होगा
-इसके लिए नाममात्र शुल्क या तय फीस ली जा सकती है
-नंबर रिटेंशन केवल उसी श्रेणी के वाहन (दो पहिया से दो पहिया, चार पहिया से चार पहिया) पर संभव हो सकता है
(अंतिम नियम शासन की अधिसूचना के बाद तय होंगे)
प्रदेश में नंबर रिटेंशन की सुविधा शुरू करने की कवायद चल रही है। इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही यह सुविधा शुरू की जाएगी। विवेक शर्मा, कमिश्नर, परिवहन विभाग
देश के कई राज्यों में यह सुविधा पहले से सफलतापूर्वक चल रही है। पंजाब, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में वाहन मालिक अपने पसंदीदा नंबर सुरक्षित रख पा रहे हैं। इन राज्यों में नंबर रिटेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन और निर्धारित शुल्क की व्यवस्था है, जिससे प्रक्रिया आसान हो जाती है।
प्रदेश में यह सुविधा लागू होने के बाद वीआइपी, फैंसी और विशेष नंबर लेने वाले वाहन मालिकों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। ऐसे नंबरों के लिए लोग हजारों से लेकर लाखों रुपए तक खर्च करते हैं, लेकिन वाहन बेचते ही अब तक नंबर भी हाथ से निकल जाता था।
-महंगे नंबर सुरक्षित रहेंगे
-बार-बार नई बोली में पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा
-नंबर एक ब्रांड और पहचान के रूप में बना रहेगा
आरटीओ और परिवहन विभाग पर असर
नई व्यवस्था लागू होने से आरटीओ कार्यालयों में नंबर ट्रांसफर और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही, विभाग को रिटेंशन शुल्क के रूप में अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना भी है।
-वाहन नंबर को लेकर भावनात्मक जुड़ाव रखने वालों को राहत।
-वीआइपी नंबरों की वैल्यू बनी रहेगी।
-वाहन खरीद-फरोख्त आसान होगी।
-डिजिटल और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
Published on:
27 Jan 2026 10:32 am
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