
MP high Court Indore
MP High Court Hearing on contaminated water deathइंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर दायर की गई जनहित याचिकाओं पर आज मंगलवार 27 जनवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है, थोड़ी देर में कोर्ट की ये कार्यवाही शुरू हो जाएगी। बता दें कि पिछली बार 20 जनवरी को मामले पर सुनवाई हुई थी, जो करीब डेढ़ घंटे तक चली।
मामले में पिछली बार हुई सुनवाई के दौरान शासन ने दूषित पानी के कारण मौतों की इस घटना का कारण पुलिस चौकी के टॉयलेट को बताया था। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या इससे पानी इतना दूषित हो सकता है? कोर्ट ने पूछा कि कहीं कोई केमिकल तो नहीं मिला। हालांकि, पूरी बहस के दौरान कोई ठोस कारण सामने नहीं आ सका।
भागीरथपुरा में अब तक 28 मौतें हो चुकी हैं। आखिरी मौत कांग्रेस नेता राजाराम बोरासी की बताई गई थी। लेकिन, जैसे ही मौत की खबर सामने आई, स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल उनकी मेडिकल रिपोर्ट जारी कर इसका खंडन किया था कि उनकी मौत दूषित पानी से नहीं हुई। जबकि परिजनों का दावा है कि मौत गंदे पानी की वजह से हुई है। परिजनों ने 24 जनवरी को अर्थी रखकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। बोरासी की मौत पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी भी भागीरथपुरा पहुंचे थे।
हाईकोर्ट में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई में कहा था कि कई जगह सीवरेज और वाटर लाइन आपस में मिलती हैं, लेकिन क्या इससे पानी इतना अधिक दूषित हो सकता है कि लोगों की जान चली जाए! कहीं कोई केमिकल तो नहीं मिला, क्या अब तक कोई ठोस कारण सामने आया है।
इस पर शासकीय अधिवक्ता ने कहा था कि यह कुछ कारणों में से एक हो सकता है। बोरवेल का पानी भी दूषित पाया गया था, जो मैन लाइन में मिला। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा था कि भागीरथपुरा कान्ह नदी के किनारे स्थित है। यहां से दूषित पानी बोरिंग में गया और फिर सीवरेज लाइन तथा नर्मदा लाइन में मिल गया, जिससे यह घटना हुई। कुल मिलाकर अब तक इस घटना की कोई ठोस वजह सामने नहीं आ सकी है।
अधिवक्ता अजय बागड़िया ने पिछली सुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वर्ष 2017 की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा था, कि इसमें पहले ही स्पष्ट हो चुका था कि पूरे शहर में दूषित पानी की समस्या है, लेकिन अधिकारियों ने रिपोर्ट को दबाकर रखा और किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि हर रिपोर्ट में ई-कोलाई और फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए, फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने बताया कि फरवरी 2023 में मालवा इंजीनियर को भागीरथपुरा का ठेका दिया था। ठेके की शर्तों के अनुसार एक साल में काम पूरा होना था और इससे दूषित पानी की समस्या खत्म होनी थी। लेकिन, ठेका मिलने के दो से ढाई साल बाद यह घटना सामने आ गई। ऐसे में सवाल है कि ठेकेदार ने क्या काम किया और निगम ने उस पर क्या कार्रवाई की? उनका कहना था कि पहले संबंधित इंजीनियर पर ही केस दर्ज होना चाहिए।
बता दें कि इस मामले मेंइंदौर के भागीरथपुरा में भले ही 28 मौतें दर्ज की गी हैं, लेकिन प्रशासन इनमें से सुभद्राबाई, विद्या बाई, हेमंत गायकवाड़ और बद्री प्रसाद की मौत को दूषित पानी या डायरिया होने से मौत के मामलों में नहीं गिन रहा।
Published on:
27 Jan 2026 09:35 am
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