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Ghooskhor Pandat: MP पहुंचा मनोज वाजपेयी की वेब सीरीज का बवाल, कोर्ट में हुई शिकायत

MP News: मनोज बाजपेयी की वेबसीरीज के नाम ने विवाद खड़ा कर दिया है। जिला कोर्ट में दायर परिवाद में ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत होने का आरोप है।

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इंदौर

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Akash Dewani

Feb 10, 2026

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ghooskhor pandat controversy (फोटो- गूगल फोटो)

Ghooskhor Pandat Controversy: यह मामला हाल के दिनों में वेब कंटेंट और धार्मिक भावनाओं के टकराव का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है। अभिनेता मनोज वाजपेयी (Manoj Bajpayee) अभिनित एक वेबसीरीज के खिलाफ इंदौर जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि वेबसीरीज के नाम के कारण ब्राह्मण समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। यह परिवाद विकास अवस्थी द्वारा लगाया गया है, जिसकी जानकारी उनके अधिवक्ता आकाश शर्मा ने दी। (MP News)

पंडत शब्द से है दिक्कत, ब्राह्मणों की भावनाएं हुई आहात

परिवाद के अनुसार, ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) पर हाल ही में एक वेबसीरीज का ट्रेलर जारी किया गया है, जिसका नाम 'घूसखोर पंडत' बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग पारंपरिक रूप से ब्राह्मण समाज के उन लोगों के लिए किया जाता है, जो धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और नैतिक आचरण से जुड़े होते हैं। यह शब्द समाज में सम्मान और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इसके साथ ‘घूसखोर’ जैसे नकारात्मक शब्द को जोड़ना पूरे ब्राह्मण समाज की छवि को धूमिल करता है और उसे भ्रष्टाचार से जोड़ने का प्रयास करता है।

जिला कोर्ट तक पहुंचा मामला

परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए के तहत किसी वर्ग या समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर नेटफ्लिक्स, वेबसीरीज के निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे, अभिनेता मनोज वाजपेयी समेत अन्य संबंधित पक्षों को परिवाद में पार्टी बनाया गया है।

अधिवक्ता आकाश शर्मा के अनुसार, इस मामले में न्यायालय में शीघ्र ही परिवादी के बयान दर्ज कराए जाएंगे, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए कोर्ट से आग्रह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक-धार्मिक सम्मान के बीच संतुलन का है, जिस पर न्यायालय को विचार करना होगा।

पहले भी हो चुकी है आपत्तियां

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई फिल्मों और वेबसीरीज के नाम या कंटेंट को लेकर धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा आपत्ति जताई जाती रही है। ऐसे मामलों में अदालतें अक्सर यह जांच करती हैं कि संबंधित कंटेंट जानबूझकर किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से बनाया गया है या नहीं। अब देखना होगा कि इंदौर जिला न्यायालय इस परिवाद पर क्या रुख अपनाता है और आगे की सुनवाई में क्या दिशा तय होती है। (MP News)