
ऋण राहत
आर्थिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद
गोवा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने बैंकों से अपील की है कि वे खनन बंदी से प्रभावित कर्जदारों के प्रति नरम रवैया अपनाएं, क्योंकि राज्य में खनन गतिविधियों के फिर शुरू होने से इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। लॉजिस्टिक्स समिति के प्रमुख चंद्रकांत गवास ने कहा कि खनन बंद होने से हजारों परिवारों और व्यवसायों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई, जिसके चलते करीब 5,000 करोड़ रुपए के कर्ज तनावग्रस्त हो गए। लगभग 1,500 उधारकर्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ा है। उन्होंने बैंकों से अनुरोध किया कि वे कर्ज पुनर्गठन के लिए लचीली शर्तें अपनाएं और उत्पादन संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नए अनुबंधों पर विचार करें। गवास ने चेतावनी दी कि यदि बैंकों ने गिरवी संपत्तियों को जबरन बेचना शुरू किया तो ग्रामीण खनन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। वर्तमान में चार खनन ब्लॉक संचालन में हैं और अप्रेल में छह नए ब्लॉकों की नीलामी प्रस्तावित है। चालू वित्त वर्ष में 10 मिलियन टन से अधिक लौह अयस्क उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।
ऋण राहत योजना को आगे बढ़ाया
गोवा सरकार ने भी प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए ऋण राहत योजना को आगे बढ़ाया है। इसके तहत 35 प्रतिशत तक ऋण सब्सिडी, ब्याज में पूर्ण छूट तथा ट्रक और बार्ज मालिकों के लिए मूलधन में आंशिक छूट का प्रावधान किया गया है। उद्योग जगत का मानना है कि खनन गतिविधियां पूरी तरह शुरू होने पर रोजगार और परिवहन क्षेत्र में नई जान आएगी।
Published on:
09 Feb 2026 04:27 pm
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