
यूनिटी मॉल प्रोजेक्ट
यह आंदोलन बीते पांच दिनों से लगातार जारी है, जिसमें स्थानीय नागरिकों और आदिवासी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए फर्नांडिस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और उसके मंत्री आदिवासी समुदाय की जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। फर्नांडिस ने कहा कि यूनिटी मॉल परियोजना राज्य के हित में नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों के फायदे के लिए लाई जा रही है। उनके अनुसार, यह परियोजना गोवा की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाएगी। फर्नांडिस ने यह भी कहा कि आदिवासियों की जमीन पर विकास के नाम पर कब्जा करने की कोशिश किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी और इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप
आदिवासी समुदाय के नेता मनोज परब ने कहा कि उनकी संस्था गोवा की पहचान, पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बावजूद सरकार आदिवासी समुदाय की चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है। परब ने कहा कि यूनिटी मॉल प्रोजेक्ट पर काम लगातार जारी रहना इस बात का संकेत है कि सरकार जनभावनाओं की परवाह किए बिना अपनी जिद पर अड़ी हुई है। उन्होंने इसे सरकारी दादागिरी करार देते हुए कहा कि इससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
पारंपरिक जीवनशैली पर गहरा असर
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना से न केवल आदिवासियों की जमीन प्रभावित होगी, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली पर भी गहरा असर पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने परियोजना पर पुनर्विचार नहीं किया, तो विरोध को राज्यव्यापी आंदोलन में बदला जाएगा। स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते जनदबाव के बीच यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और संवेदनशील होता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक यूनिटी मॉल प्रोजेक्ट को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।
Published on:
03 Jan 2026 07:02 pm
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