
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Gemini AI
Yellow Fever : येलो फीवर को लेकर मुंबई एयरपोर्ट पर एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि उसने फेक येलो फीवर वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिखाया था। दरअसल, यह एक गंभीर वायरल बीमारी है जिसको लेकर भारत सरकार की हेल्थ एंजेसी चौकन्नी हैं। अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से आने वालों को भारत में येलो फीवर वैक्सीन सर्टिफिकेट देखने के बाद ही एंट्री दी जा रही है। साथ ही उनको निगरानी में भी रखा जा रहा है ताकि देश में ये खतरनाक बुखार ना फैले। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-
यह एक वायरल रक्तस्रावी बुखार (Viral Hemorrhagic Fever) है जो संक्रमित मच्छरों (Aedes aegypti) के काटने से फैलता है। 'येलो' (पीला) शब्द उस पीलिया (Jaundice) की ओर इशारा करता है जो इस बीमारी के कुछ गंभीर मरीजों को हो जाता है। इसलिए, इसे येलो फीवर के नाम से जानते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की जानकारी के मुताबिक, येलो फीवर यह एक इंसान से दूसरे इंसान में सीधे नहीं फैलता है। जब कोई मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति या बंदर को काटता है और फिर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो इस तरह से ये वायरस फैल जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इसके लक्षण संक्रमण के 3 से 6 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं। आप इसे ऐसे समझ सकते हैं-
लगभग 15% मरीजों में संक्रमण का दूसरा, अधिक खतरनाक चरण शुरू होता है। ये खतरनाक लक्षण निम्नलिखित हैं-
टीकाकरण (Vaccine) येलो फीवर से बचने का सबसे प्रभावी तरीका बताया जाता है। YF-17D वैक्सीन है। यह जीवनभर के लिए सुरक्षा प्रदान करती है। कई देशों की यात्रा करने के लिए इस वैक्सीन का सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है। इसके अलावा आपको मच्छरों से बचना होगा। फुल स्लीव्स के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का उपयोग करें आदि।
27 अफ्रीकन देश और 13 लैटीन अमेरिकन देशों में येलो फीवर को लेकर हाई अलर्ट है। यहां पर काफी अधिक मामले हैं। वहीं, भारत में अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। पर, इन देशों से लौटने वालों के लिए येलो वैक्सीन सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इतना ही नहीं, अहमदाबाद में हाल ही में येलो फीवर के लिए दो टीकाकरण केंद्रे खोले गए हैं।
Published on:
21 Feb 2026 01:55 pm
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