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Delhi Air Pollution: कोरोना तो चला गया, लेकिन ये साइलेंट किलर आज भी ले रहा है जान! 8 साल में हुई 80 हजार मौतें, जानें इस बीमारी के बारे में

Delhi Air Pollution: दिल्ली में प्रदूषण और खराब हवा के कारण सांस की बीमारियों से मौतें लगातार बढ़ रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या सालों से गंभीर बनी हुई है।

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भारत

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Dimple Yadav

Jan 17, 2026

Delhi Air Pollution

Delhi Air Pollution (Photo- gemini ai)

Delhi Air Pollution: दिल्ली एक बार फिर भीषण प्रदूषण और कड़ाके की ठंड की चपेट में है। हर सर्दी में स्मॉग, जलन भरी आंखें और सांस लेने में दिक्कत आम बात हो गई है। लेकिन असली खतरा सिर्फ कुछ दिनों का नहीं, बल्कि लंबे समय तक शरीर पर पड़ने वाला असर है। सवाल यह है कि क्या राजधानी में रहना ही धीरे-धीरे जानलेवा बनता जा रहा है?

सांस की बीमारियों से बढ़ती मौतें

दिल्ली स्टैटिस्टिकल हैंडबुक 2025 के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में दिल्ली में 9,211 लोगों की मौत सांस से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई। 2023 में यह आंकड़ा 8,801 और 2022 में 7,432 था। यानी हर साल मौतों की संख्या बढ़ रही है, जो हालात की गंभीरता को दिखाती है।

कोविड के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

साल 2021 में कोविड-19 के कारण हालात सबसे खराब रहे थे, जब 14,442 मौतें सांस की बीमारियों से दर्ज की गईं। इसके बाद भले ही आंकड़े कुछ कम हुए हों, लेकिन अब वे फिर से धीरे-धीरे ऊपर जाने लगे हैं। इसका मतलब है कि कोविड चला गया, लेकिन दिल्ली की हवा से जुड़ी पुरानी समस्या आज भी बनी हुई है।

सालों से चली आ रही गंभीर परेशानी

अगर 2016 से 2020 के आंकड़ों को देखें तो हर साल करीब 7,500 से 8,500 लोगों की जान सांस की बीमारियों के कारण जाती रही। महामारी ने इस सिलसिले को थोड़े समय के लिए बदला, लेकिन अब दिल्ली फिर उसी पुराने रास्ते पर लौटती दिख रही है। यानी यह कोई नई समस्या नहीं, बल्कि सालों से जमी हुई चुनौती है।

मौतों की बड़ी वजह बनी सांस की बीमारी

2016 से 2024 के बीच दिल्ली में 80 हजार से ज्यादा मौतें सांस की बीमारियों से हुई हैं। यह दिल्ली में मौतों की तीसरी सबसे बड़ी वजह है। पहले नंबर पर दिल की बीमारियां और दूसरे नंबर पर संक्रामक रोग हैं। कैंसर और पेट से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौतें इससे काफी कम हैं।

जहरीली हवा और कमजोर फेफड़े

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या की सबसे बड़ी वजह लगातार जहरीली हवा में सांस लेना है। सर्दियों में गाड़ियों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषण, निर्माण कार्य और पराली का धुआं मिलकर हवा को और खराब कर देते हैं। इससे अस्थमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं।

सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं

दिल्ली की सांस की कहानी केवल कुछ दिनों के प्रदूषण की नहीं है। यह एक लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्या है, जो हर साल हजारों जानें ले रही है। यहां हवा और सेहत अब एक-दूसरे से अलग नहीं रहीं। दिल्ली में सांस लेना ही आज एक गंभीर पब्लिक हेल्थ चैलेंज बन चुका है।