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क्या दिल टूटने से सच में मौत हो सकती है? डॉक्टर ने बताया क्या है Broken Heart Syndrome

Broken Heart Syndrome : क्या सच में टूटे दिल से इंसान मर सकता है? कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मार्क गिलिनोव बता रहे हैं दिल टूटने का दिल और सेहत पर असर।

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भारत

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Dimple Yadav

Jan 24, 2026

Broken Heart Syndrome

Broken Heart Syndrome (photo- gemini ai)

Broken Heart Syndrome: जिंदगी में ज्यादातर लोग कभी न कभी दिल टूटने का दर्द झेलते हैं। किसी अपने को खो देना, रिश्ता खत्म हो जाना या नौकरी चली जाना, ये सब ऐसी घटनाएं हैं जो इंसान को अंदर तक हिला देती हैं। अक्सर हम इसे सिर्फ भावनात्मक तकलीफ मानते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इसका सीधा असर दिल और पूरी सेहत पर भी पड़ता है।

डॉक्टर क्या कहते हैं?

मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मार्क गिलिनोव (Dr. Marc Gillinov) बताते हैं कि जब इंसान गहरे दुख, डर या तनाव से गुजरता है, तो शरीर में कई शारीरिक बदलाव होते हैं। उनके मुताबिक, तेज भावनाएं जैसे दुख, गुस्सा या डर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ा देती हैं, जिससे दिल की सेहत प्रभावित होती है। हालांकि टूटे दिल से मौत होना बहुत ही दुर्लभ है।

जब दिल टूटना शरीर में दर्द बन जाए

दिल टूटने पर सिर्फ मन ही नहीं दुखता, बल्कि शरीर भी प्रतिक्रिया देता है। स्ट्रेस की वजह से दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। कई लोगों को छाती में भारीपन, घबराहट और बेचैनी महसूस होती है।

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम: डॉक्टरों के लिए भी चुनौती

डॉ. गिलिनोव बताते हैं कि कुछ दुर्लभ मामलों में इंसान को ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में टाकोट्सुबो कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है। इस स्थिति में अचानक बहुत ज्यादा भावनात्मक झटका लगने पर दिल की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे होते हैं, छाती में तेज दर्द, सांस फूलना, दिल की धड़कन का अनियमित होना और चक्कर आना। डॉक्टर साफ कहते हैं कि ऐसे लक्षण दिखें तो देर किए बिना इमरजेंसी इलाज जरूरी है, क्योंकि जांच में यह हार्ट अटैक जैसा ही दिखाई देता है।

हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा

डॉ. गिलिनोव के अनुसार, लंबे समय तक दुख और तनाव में रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और खून के थक्के बनने का खतरा भी बढ़ता है। जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी है या परिवार में हार्ट अटैक का इतिहास रहा है, उनके लिए यह स्थिति ज्यादा खतरनाक हो सकती है।

डिप्रेशन भी दिल को कमजोर करता है

डॉक्टर बताते हैं कि दिल टूटने के बाद अगर उदासी लंबे समय तक बनी रहे, तो यह डिप्रेशन में बदल सकती है। डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा देखा गया है। इसी वजह से डॉक्टर सलाह देते हैं कि दिल के मरीजों की मानसिक सेहत और डिप्रेशन के मरीजों के दिल की जांच जरूर होनी चाहिए।

डॉक्टर की सलाह: दिल और दिमाग दोनों का ख्याल रखें

डॉ. मार्क गिलिनोव कहते हैं कि अगर किसी को हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। वहीं, लंबे समय तक दुख या खालीपन महसूस हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना जरूरी है। उनके अनुसार, दिल टूटने का दर्द छोटा नहीं होता, लेकिन सही इलाज और सहारे से सेहत और जिंदगी दोनों को बचाया जा सकता है।