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जवानी में जाम हो रही नसें! युवाओं में तेजी से बढ़ रही Varicose Veins की समस्या

Varicose Veins की समस्या अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना, मोटापा और गलत लाइफस्टाइल इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं। जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 11, 2026

Varicose Veins

Varicose Veins (Photo- gemini ai)

Varicose Veins Symptoms: बदलती जीवनशैली और कामकाज के तरीके के कारण नसों से जुड़ी बीमारी वैरिकोज वेन्स के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले यह समस्या अधिकतर बुजुर्गों और महिलाओं में देखने को मिलती थी, लेकिन अब बड़ी संख्या में युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

एसएमएस अस्पताल की सीटीवीएस ओपीडी में रोजाना 8 से 10 नए मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें से 2 से 3 मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार आने वाले मरीजों में लगभग 35 से 40 प्रतिशत युवा शामिल हैं, जो चिंता का विषय है। विशेषज्ञों के अनुसार जब पैरों की नसें फूलकर उभरने लगती हैं, इसे ही वैरिकोज वेन्स कहा जाता है।

थकान समझकर नजरअंदाज करना गलत

विशेषज्ञ बताते हैं कि मोटापा, नसों के वाल्व का कमजोर होना, धूम्रपान, कब्ज और शरीर में पानी की कमी भी इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में खड़े रहने की आदत जोखिम बढ़ा देती है। कई युवा पैरों में दर्द या भारीपन को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी बढ़ जाती है और उपचार कठिन हो जाता है।

लक्षण कैसे पहचानें

  • पैरों की नसों का उभरना
  • पैरों में दर्द और भारीपन
  • नसों का मुड़ना, फूलना, खुजली
  • खड़े रहने पर पैरों में सूजन
  • रात में पैरों में ऐंठन
  • नसों का नीला दिखना
  • घाव बनना या देर से भरना

अंग हटाने तक की नौबत

विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय पर उपचार नहीं कराया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। कई मामलों में संक्रमण बढ़ने पर अंगुली या अंग हटाने तक की नौबत भी आ जाती है।

बचाव के उपाय

लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने वाले लोग बीच-बीच में चलते रहें। पर्याप्त पानी पिएं और वजन नियंत्रित रखें। लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

समय पर ध्यान नहीं दिया तो गंभीर खतरा

वैरिकोज वेन्स की समस्या अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। कई मरीज अनदेखी के कारण देर से अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। संक्रमण या जख्म बनने की स्थिति में सर्जरी कर अंग हटाने तक की नौबत आ सकती है। समय पर ध्यान न देने पर यह बीमारी डीप वेन थ्रोम्बोसिस का रूप ले सकती है, जिससे नसों के अंदर खून का थक्का बन जाता है। अगर यह थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाए तो जानलेवा भी हो सकता है।