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ग्वालियर, Jun 02, 2026

ग्वालियर में बढ़ा इन्वेस्टमेंट, 44371 मकान मिले खाली, 1.01 लाख से अधिक घरों में खुले दफ्तर और गोदाम

शहर बदल रहा है, और इस बदलते शहर की जो तस्वीर जनगणना के डिजिटल सर्वे ने खींची है, वह वाकई हैरान करने वाली है। अगर आप सोच रहे हैं कि ग्वालियर में पैर रखने की जगह नहीं है

investment gwalior

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ग्वालियर. शहर बदल रहा है, और इस बदलते शहर की जो तस्वीर जनगणना के डिजिटल सर्वे ने खींची है, वह वाकई हैरान करने वाली है। अगर आप सोच रहे हैं कि ग्वालियर में पैर रखने की जगह नहीं है, तो जरा ठहरिए! जिले में मकानों की जो गणना पूरी हुई है, उसने रियल एस्टेट की एक तस्वीर उभर कर सामने आई है। जिले में कुल 55,288 मकान खाली पड़े हैं, जिनमें से अकेले नगर निगम क्षेत्र में ही 44,371 घर खाली मिले हैं। यानी लोगों ने इन्वेस्टमेंट के लिए आशियाने तो खरीद लिए, पर वहां रहने वाला कोई नहीं है।

आवासीय मकान घटे

एक और बड़ा ट्रेंड जो सामने आया है, वह यह कि अब घर सिर्फ रहने के लिए नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बन रहे हैं। जिले के 1,01,795 मकानों का इस्तेमाल बल्कि दुकान, दफ्तर या गोदाम के रूप में हो रहा है। यही वजह है कि जिले में आवासीय मकानों की संख्या घटकर 4.49 लाख ही रह गई है। जिले की कुल जनसंख्या 24 लाख 35 हजार 519 हो गई है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी नगर निगम क्षेत्र की है, जहां 14.54 लाख लोग निवास कर रहे हैं। 10 में से 6 लोग निगम सीमा में निवास कर रहे हैं, जबकि 4 गांव में। जिला जनगणना अधिकारी अनिल बनवारिया का कहना है कि मकानों की गणना का कार्य पूरा हो गया है।

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निगम सीमा में इन पांच गलतियों को सुधारा गया

  • शहर में सिर पर मैला ढोना बताया था। जबकि यह व्यवस्था सालों पर पहले खत्म हो चुकी है।
  • शहर खुले में शौंच फ्री है। शहर में खुले में शौंच की गलती को सुधारा गया, जबकि ग्रामीण वार्ड में खुले में शौच वाले मिले।
  • गैस के उपयोग की जगह लकड़ी व स्टोव पर खाना बनाना बताया। ईधन में सुधार किया गया है।
  • प्रकाश उपयोग में लालटेन व चिमनी का उपयोग बताया। इसका भी सुधार किया गया।
  • शहर में घर के आगे नदी बताई है। उसका पानी उपयोग करते हैं, इस गलती में सुधार किया गया है।

डबरा और भितरवार में भारी बसावट

उप-जिलों में डबरा के बाद घाटिगांव (1.28 लाख), भितरवार (1.21 लाख) और चिनौर (1.11 लाख) सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र हैं। इसके विपरीत, सिटी सेंटर क्षेत्र में सबसे कम 19,309 की आबादी दर्ज की गई है, जो मुख्य रूप से पूर्णत: व्यावसायिक गतिविधियों और पॉश कॉलोनियों के सीमित आवासीय ढांचे को दर्शाती है। सिटी सेंटर में 8 राजस्व ग्राम हैं, जिसके कारण सेक्टर छोटा बना था।

गावं में हैंडपंप व कुएं का पी रहे पानी

ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल के लिए हैंडपंप व कुएं का उपयोग कर रहे हैं। चूल्हे पर रोटी बना रहे हैं। हालांकि गांव में लोग आज भी खुले में शौंच के लिए जा रहे हैं। शहर में फिल्टर व नॉन फिल्टर दोनों तरह का पानी उपयोग हो रहा है। जबकि ग्रामीण में बिना फिल्टर पानी पी रहे हैं।

आंकड़ों का डिजिटल एक्स-रे (एक नजर में)

सर्वे का पैमाना----------------------------कुल आंकड़ा
कुल चिन्हित जनगणना मकान-----------6,24,875
पूरी तरह आवासीय उपयोग में--------------4,49,675
खाली पड़े मकान (कुल जिले में)-----------55,288
खाली पड़े मकान (सिर्फ नगर निगम में)---44,371
गैर-आवासीय उपयोग (दुकान/गोदाम)-----1,01,795
आंशिक रूप से आवासीय मकान------------18,117

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