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पाम ऑयल जब्ती मामला: निचली कोर्ट के आदेश पर र उठाए सवाल, भवन अनुमति और डेयरी संचालन पर मांगा जवाब

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पाम ऑयल की बड़ी खेप जब्ती से जुड़े मामले में अपीलीय अधिकरण (निचली अदालत) के आदेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन पर अपीलीय अधिकरण ने विचार नहीं किया। यह जांचना जरूरी है कि क्या […]

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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पाम ऑयल की बड़ी खेप जब्ती से जुड़े मामले में अपीलीय अधिकरण (निचली अदालत) के आदेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए अहम निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पाम ऑयल की बड़ी खेप जब्ती से जुड़े मामले में अपीलीय अधिकरण (निचली अदालत) के आदेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए अहम निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पाम ऑयल की बड़ी खेप जब्ती से जुड़े मामले में अपीलीय अधिकरण (निचली अदालत) के आदेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन पर अपीलीय अधिकरण ने विचार नहीं किया। यह जांचना जरूरी है कि क्या प्रदीप के मकान में बेसमेंट बनाने की विधिवत अनुमति थी, और यदि थी तो क्या उस बेसमेंट का उपयोग वाणिज्यिक भंडारण के लिए किया जा सकता था। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि बंटी की वास्तव में जौरा में डेयरी संचालित करता है या नहीं।

मामला राज्य सरकार द्वारा दायर द्वितीय अपील से जुड़ा है। राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि 153 सीलबंद टिन पाम ऑयल प्रतिवादी क्रमांक-1 प्रदीप के मकान के बेसमेंट से जब्त किए गए थे। प्रतिवादी का दावा है कि यह पाम ऑयल प्रतिवादी क्रमांक-2 बंटी का था, जो जौरा में दूध डेयरी का संचालन करता है और उसने केवल परिसर किराए पर दिया था। अपीलीय अधिकरण ने यह कहते हुए अधिनिर्णय प्राधिकरण के आदेश को निरस्त कर दिया था कि अभियोजन यह सिद्ध नहीं कर पाया कि प्रतिवादी क्रमांक-2 जौरा में कोई डेयरी चलाता है, न ही डेयरी से कोई सैंपल लिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि केवल मकान किराए पर देने के आधार पर प्रतिवादी क्रमांक-1 को दंडित नहीं किया जा सकता। 5 फरवरी 2026 को होगी।