
प्रतियोगिता में शामिल हुए गिनती के धावक
ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय के खेल विभाग की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। अंतरमहाविद्यालयीन क्रॉस-कंट्री प्रतियोगिता की सूचना अंतिम समय पर जारी किए जाने के कारण विश्वविद्यालय से संबद्ध कई कॉलेजों के धावक प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सके। इसका सीधा असर यह रहा कि शनिवार सुबह कड़ाके की ठंड में आयोजित प्रतियोगिता में महज 14 धावक ही दौड़ते नजर आए, जिनमें से 11 धावक एसओएस से थे।
शनिवार सुबह 6 बजे आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की बेहद कम संख्या ने आयोजन की गंभीरता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए। विश्वविद्यालय से जुड़े कई कॉलेजों के खेल अधिकारियों और कोचों का कहना है कि प्रतियोगिता की सूचना उन्हें आयोजन से केवल 15 घंटे पहले दी गई। ऐसे में खिलाड़ियों को तैयार करना और समय पर ग्वालियर पहुंचना संभव नहीं था।
दरअसल, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक की मेजबानी में अखिल भारतीय क्रॉस-कंट्री पुरुष प्रतियोगिता 15 फरवरी से आयोजित होनी है, जिसकी एंट्री की अंतिम तिथि 30 जनवरी थी। चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय ने 30 जनवरी को आनन-फानन में अंतरमहाविद्यालयीन प्रतियोगिता करा दी।
सूत्रों का आरोप है कि पत्र जानबूझकर अंतिम समय पर जारी किया गया, ताकि सीमित खिलाड़ी ही भाग लें और मेजबान एसओएस के धावकों को अधिक अवसर मिल सके। यही वजह रही कि अन्य कॉलेजों के कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी प्रतियोगिता से बाहर रह गए।
आमतौर पर इस प्रतियोगिता में करीब 150 धावक हिस्सा लेते हैं, लेकिन इस बार संख्या 14 तक सिमट गई। केआरजी कॉलेज की रूपेन्द्र कौर, पिछले वर्ष की पदक विजेता होने के बावजूद शामिल नहीं हो सकीं। इसी तरह लवली राजपूत, रेशम, महक खान और एसएलपी कॉलेज के धावक अनुज गोयल भी प्रतियोगिता से वंचित रह गए।
खेल अधिकारियों का कहना है कि यह कार्यप्रणाली खेल भावना के खिलाफ है और इससे खिलाड़ियों का मनोबल टूटता है।
गौरतलब है कि प्रतियोगिता के दौरान स्पोर्ट्स डायरेक्टर प्रो. संजय कुलश्रेष्ठ आयोजन स्थल पर नहीं पहुंचे और फोन कॉल भी रिसीव नहीं किया गया।
Updated on:
01 Feb 2026 06:32 pm
Published on:
01 Feb 2026 06:30 pm

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