
हाईकोर्ट ने वेतन सीमित करने वाली शर्तें की निरस्त, 120 दिन में लाभ देने के निर्देश, 75 याचिकाओं का किया निराकरण
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्थायी श्रेणी में वर्गीकृत कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि स्थायी श्रेणी कर्मचारियों को उनकी वर्गीकरण की तिथि से ही न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ता दिया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन शर्तों को निरस्त कर दिया है, जिनके जरिए विभागों द्वारा वेतनमान के लाभ को सीमित किया जा रहा था। यह निर्णय न्यायमूर्ति आशीष श्रोती द्वारा जल संसाधन विभाग सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की ओर से दायर 75 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के रामनरेश रावत बनाम अश्विनी राय प्रकरण में तय सिद्धांतों के अनुसार न्यूनतम वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि स्थायी श्रेणी कर्मचारी और नियमित कर्मचारी की स्थिति भले ही समान न हो, लेकिन स्थायी श्रेणी कर्मचारी को न्यूनतम वेतनमान देने का अधिकार कानून से प्राप्त है। किसी भी आदेश में जो शर्त इस अधिकार पर रोक लगाती है, वह असंवैधानिक और अवैध मानी जाएगी। कोर्ट ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसे प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू नहीं रह सकते। जल संसाधन विभाग के स्थायी श्रेणी कर्मचारियों को वर्गीकरण की तिथि से न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिलेगा। अन्य विभागों के कर्मचारियों के मामलों में, यदि शासन ने पृथक निर्णय नहीं लिया है, तो उन्हें दावा प्रस्तुत करने से तीन वर्ष पूर्व की अवधि से यह लाभ दिया जाएगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि एरियर राशि पर कर्मचारियों को ब्याज का लाभ नहीं मिलेगा। संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता द्वारा आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की तिथि से 120 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर लाभ प्रदान किया जाए। इस फैसले को राज्यभर के हजारों स्थायी श्रेणी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से वे न्यूनतम वेतनमान को लेकर न्यायालय की शरण में थे।
Published on:
20 Jan 2026 11:26 am
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