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तीन साल बाद परिषद से मिली ई-चार्जिंग स्टेशन की मंजूरी, चालू होने के लिए करना होगा इंतजार

शहर में इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम तो उठाया गया है, लेकिन रफ्तार अब भी बेहद धीमी है। तीन साल के लंबे इंतजार के बाद नगर

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ग्वालियर. शहर में इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम तो उठाया गया है, लेकिन रफ्तार अब भी बेहद धीमी है। तीन साल के लंबे इंतजार के बाद नगर निगम परिषद ने इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन को अनुमति दे दी है, लेकिन शहरवासियों को अभी भी इन्हें इस्तेमाल करने के लिए करीब दो सप्ताह और इंतजार करना होगा। परिषद से ठहराव मिलने के बाद अब निगम का विद्युत विभाग एक बार फिर ट्रायल प्रक्रिया पूरी करेगा, इसके बाद ही चार्जिंग स्टेशन आमजन के लिए शुरू हो सकेंगे। फिलहाल सिटी सेंटर सालासर मल्टीलेवल पार्किंग, तरण पुष्कर और कंपू मल्टीलेवल पार्किंग पर बने चार्जिंग स्टेशन पहले चरण में चालू होंगे, लेकिन इन तीनों ही स्थानों पर ट्रांसफार्मर को चालू करने में समय लगेगा। जबकि शेष दो स्थानों पर सुविधाएं शुरू होने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है।

1.79 करोड़ की योजना, लेकिन आधे-अधूरे काम

नगर निगम ने 15वें वित्त आयोग की राशि से करीब 1.79 करोड़ रुपए खर्च कर इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन परियोजना शुरू की थी। योजना के तहत शहर में सात स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाने थे, लेकिन फिलहाल सिर्फ तीन जगहों पर ही काम पूरा हो सका है। बहोड़ापुर और हजीरा मल्लगढ़ा जैसे चिन्हित स्थानों पर तो अभी तक कार्य शुरू ही नहीं हो पाया है।

कहां कितनी मशीनें लगीं

चार्जिंग के लिए ग्वालियर में कुल सात मशीनें भेजी गई थीं। इसमें कंपू मल्टीलेवल पार्किंग और सालासर सिटी सेंटर मल्टीलेवल पार्किंग में 2-2 मशीनें,तरण पुष्कर खेल मैदान, बहोड़ापुर क्षेत्रीय कार्यालय-1 और हजीरा मल्लगढ़ा क्षेत्र में एक-एक मशीन है। जहां दो मशीनें लगी हैं, वहां एक साथ चार वाहन, जबकि एक मशीन वाले स्थान पर दो वाहन चार्ज हो सकेंगे।

शुरू से ही विवादों में रहा प्रोजेक्ट

जानकारों के मुताबिक, यह परियोजना शुरू से ही गड़बडिय़ों का शिकार रही है। वर्ष 2023 में लेटिस कंपनी द्वारा डाले गए टेंडर में जॉइंट वेंचर के सिग्नेचर नहीं थे, आइएसओ 27001:2013 का प्रमाणपत्र गायब था और एनेक्सर पर भी हस्ताक्षर नहीं थे। इसके बावजूद वित्त और टेंडर विभाग के अधिकारियों ने टेंडर खोलकर कंपनी को काम सौंप दिया। बाद में आयुक्त के पास शिकायत पहुंची, जांच अधिकारी ने भी नोटशीट पर इन कमियों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया, लेकिन नियमों को दरकिनार करते हुए कंपनी से पांच स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन का इंस्टॉलेशन करा दिया गया। यहां तक कि 20 जून 2025 को तरण पुष्कर में ट्रायल भी कर दिया गया, जबकि अनुमति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।

यह रहेगा रेट

  • बिजली कंपनी टैरिफ: 7.14 रुपए प्रति यूनिट
  • लेबर खर्च: 4.80 रुपए प्रति घंटा
  • मेंटेनेंस: 1.00 रुपए प्रति घंटा
  • निगम मुनाफा: 2.00 रुपए प्रति घंटा
  • कुल: करीब 15 रुपए प्रति यूनिट
  • नोट : एक वाहन को चार्ज करने में 45 से 60 मिनट का समय लगेगा और औसतन 25 से 30 यूनिट बिजली की खपत होगी।

घर पर चार्ज करने को मजबूर लोग

चार्जिंग स्टेशन शुरू न होने के कारण फिलहाल ई-वाहन मालिक अपने घरों में ही रातभर वाहन चार्ज करने को मजबूर हैं। इससे न केवल समय अधिक लगता है, बल्कि घरेलू बिजली लोड भी बढ़ रहा है। चार्जिंग स्टेशन चालू होने के बाद फास्ट चार्जिंग से एक घंटे से कम समय में वाहन चार्ज हो सकेंगे, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

निगम चार्जिंग स्टेशन खा रहे धूल

मल्टीलेवल पार्किंग सालासर सिटी सेंटर, तरण पुष्कर के पास और कंपू मल्टी लेवल पाङ्क्षकग कंपू पर चार्जिंग स्टेशन लगाए जा चुके हैं। लेकिन देखरेख नहीं होने से यह धूल खा रहे है। जबकि अन्य जगह अभी नहीं लगाए हैं।

पत्रिका व्यू….

नगर निगम द्वारा ई-चार्जिंग स्टेशन शुरू किया जाना निश्चित ही पर्यावरण और आधुनिक परिवहन की दिशा में सकारात्मक पहल है, लेकिन केवल मशीनें लगाना ही पर्याप्त नहीं। जहां-जहां चार्जिंग स्टेशन बने हैं, वहां रेस्टोरेंट, कैफे या पीने के पानी जैसी सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए, ताकि 45-60 मिनट का इंतजार यात्रियों के लिए बोझ न बने। इससे निगम की अतिरिक्त आय भी बढ़ाई जा सकती है।

इनका कहना

ई-चार्जिंग स्टेशन की मंजूरी परिषद से मिल चुकी है। ठहराव आते ही जल्द ही ट्रायल कराकर चार्जिंग स्टेशन को चालू करवाया जाएगा। दो स्थानों का भी निरीक्षण कर जल्द से जल्द वहां भी काम पूरा करवाया जाएगा।
प्रदीप तोमर, अपर आयुक्त नगर