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मिलेट्स से डायबिटीज़ मैनेजमेंट तक: गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध नवाचारों की नई पहल

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य संवर्धन, पोषण सुधार, पर्यावरण संरक्षण तथा नवाचार आधारित अनुसंधान को निरंतर सशक्त किया जा रहा है।

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Up news, gorakhpur

फोटो सोर्स: पत्रिका, गोरखपुर विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय की शोध टीमों द्वारा विकसित समाजोपयोगी उत्पाद मधुमेह प्रबंधन, कुपोषण की रोकथाम एवं अपशिष्ट प्रबंधन जैसी समसामयिक चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रो. दिव्या रानी सिंह एवं शिवांगी मिश्रा द्वारा मिलेट्स एवं मोटे अनाज आधारित विशेष खाद्य उत्पाद विकसित किए गए हैं, जो डायबिटीज़ रोगियों के लिए पोषण-युक्त, फाइबर समृद्ध एवं कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले हैं। ये उत्पाद रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक हो सकते हैं।

डॉ. अनुपमा कौशिक एवं समीरा हसन ने मोरिंगा पत्ती पाउडर से पोषण-समृद्ध खाद्य उत्पाद तैयार किए हैं, जो विटामिन, खनिज एवं एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर हैं तथा स्वास्थ्य संवर्धन एवं कुपोषण रोकथाम में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

डॉ. नीता सिंह एवं तरनुम खातून द्वारा प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थों से पर्यावरण-अनुकूल, जैव-अपघटनीय एवं कम लागत वाले उत्पाद विकसित किए गए हैं, जो सतत विकास एवं प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में सराहनीय पहल है। इन सभी नवाचारों को पेटेंट से प्रोडक्ट तक लाने के लिए प्रो दिव्या रानी सिंह और उनकी टीम को कुलपति ने सराहना की है।

विश्वविद्यालय में नवाचार को संरक्षण देने हेतु बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) गतिविधियों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। सुव्यवस्थित IPR प्रणाली के माध्यम से शोध नवाचारों की पहचान, मूल्यांकन एवं संरक्षण को प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जा रहा है।

वर्तमान में बायोटेक्नोलॉजी विभाग के आयोजित प्रदर्शनी के 8 प्रमुख तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है तथा अन्य संभावित नवाचारों को पेटेंट प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा

“सशक्त बौद्धिक संपदा पारितंत्र शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और प्रभाव को प्रतिबिंबित करता है। विश्वविद्यालय में पेटेंट एवं अन्य IPR गतिविधियों में निरंतर वृद्धि से नवाचार को बल मिला है तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक रैंकिंग में प्रदर्शन को मजबूती प्राप्त हुई है।”

दो वर्षों में 79 पेटेंट आवेदन दायर किए गए

गत दो वर्षों में विश्वविद्यालय द्वारा 79 पेटेंट आवेदन दायर किए गए, जिनमें से 60 प्रकाशित हो चुके हैं तथा 2 प्रकाशन हेतु तैयार हैं। इसके अतिरिक्त 65 कॉपीराइट आवेदन दायर किए गए हैं, जिनमें 22 पंजीकृत हो चुके हैं, साथ ही एक ट्रेडमार्क आवेदन भी किया गया है।

IPR जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

IPR गतिविधियों को और सशक्त करने की दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा 31 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UPCST) के सहयोग से एक IPR जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

यह कार्यक्रम संस्थागत स्तर पर IPR साक्षरता को मजबूत करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे नवाचार एवं अनुसंधान प्रयास आत्मनिर्भर भारत तथा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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