गाज़ियाबाद, Jun 02, 2026

गांव वालों ने दफनाने के लिए जमीन देने से किया इनकार
Accused Asad Buried Ghaziabad:गाजियाबाद के खोड़ा में बहुचर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड के मुख्य आरोपी के शव को लेकर उसके पैतृक गांव में भारी आक्रोश देखने को मिला। दरअसल, पुलिस एनकाउंटर में मारे गए असद के परिजन चाहते थे उसका जनाजा बुलंदशहर स्थित उसके पैतृक गांव महुआखेड़ा में पढ़ा जाए और वहीं पर उसे दफन किया जाए, लेकिन जैसे ही गांव वालों को इस बात की भनक लगी वे इसका विरोध करने लगे। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने साफ मना कर दिया कि उसका मिट्टी इस गांव में नहीं होगा।
आपको बता दें कि ग्रामीणों के भारी विरोध के आगे मजबूर होकर आखिरकार परिजनों को आरोपी का शव वापस गाजियाबाद लाना पड़ा, जहां उसे सुपुर्द-ए-खाक किया गया। 20 साल पहले पिता ने छोड़ दिया था गांवमूल रूप से बुलंदशहर के नरसेना थाना क्षेत्र के गांव महुआखेड़ा का रहने वाला यह परिवार पिछले दो दशकों से गांव से दूर था। ग्रामीणों और परिजनों के मुताबिक, नाबालिग के पिता नवाब करीब 20 साल पहले अपना पैतृक गांव छोड़कर पूरे परिवार के साथ गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में आकर बस गए थे। शनिवार रात पुलिस मुठभेड़ में असद के ढेर होने के बाद, पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव उसके चाचा आबिद और अन्य परिजनों को सौंप दिया था।
गौरतलब है कि बकरीद के दिन 17 साल 11वीं के छात्र सूर्या चौहान की जिस बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या की गई थी, उसे लेकर महुआखेड़ा गांव के लोगों में असद के खिलाफ गहरा गुस्सा था। आरोपी के चाचा आबिद ने बताया कि पैतृक परंपरा के अनुसार वे असद का अंतिम संस्कार महुआखेड़ा में ही करना चाहते थे। लेकिन जैसे ही शव गांव पहुंचने की बात सामने आई, ग्रामीणों ने एक सुर में विरोध शुरू कर दिया और गांव के कब्रिस्तान में शव को दफनाने की अनुमति देने से मना कर दिया। सामाजिक नाराजगी और तनाव को देखते हुए परिजनों ने अपना फैसला बदला और आरोपी को गाजियाबाद के ही एक कब्रिस्तान में दफनाया गया।
चाचा बोले- 'जैसा कृत्य किया, ऊपर वाले ने वैसी ही सजा दी' असद के खौफनाक कदम से उसका अपना परिवार भी बेहद शर्मिंदा और आहत नजर आया। असद के चाचा आबिद ने दो टूक शब्दों में कहा कि नाबालिग ने गलत रास्ता चुना था और उसे उसके कर्मों का फल मिल गया। आबिद ने रोष जताते हुए कहा, 'आरोपी को ऐसा आत्मघाती कदम नहीं उठाना चाहिए था। अगर कोई विवाद या बात थी, तो उसे आपस में बैठकर सुलझाया जा सकता था या घर के बड़े-बुजुर्गों को बताना चाहिए था।'
उन्होंने आगे कहा कि असद ने जो घिनौना अपराध किया वह किसी भी सूरत में माफी के काबिल नहीं था, इसलिए जैसा उसने कृत्य किया, ऊपर वाले ने उसे वैसी ही सजा दे दी। इस घटना और एनकाउंटर के बाद से आरोपी के पैतृक गांव में लगातार सन्नाटा और चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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Updated on: 03 Jun 2026 04:03 pm

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