
फिल्म 'मायासभा' ((सोर्स: x mehwar_a_piya के अकाउंट द्वारा)
Mayasabha film: 'तुम्बाड' जैसी एटमॉस्फेरिक थ्रिलर फिल्म देने वाले डायरेक्टर राही अनिल बर्वे अपनी नई फिल्म 'मायासभा' (Mayasabha: The Hall of Illusion) के साथ एक बार फिर दर्शकों के सामने हैं। ये फिल्म न केवल 'तुम्बाड' की याद दिलाती है, बल्कि उससे भी गहरे मनोवैज्ञानिक और पौराणिक पहलुओं को भी छूती है। बता दें, 'मायासभा' एक ऐसी कहानी है जो लालच, धोखा और पीढ़ियों से चले आ रहे ट्रॉमा को एक साथ सिनेमा हॉल के पर्दे पर दिखाती है।
फिल्म की शुरुआत 2 शक्तिशाली सीन से होती है, जिसके पहले सीन में परमेश्वर (जावेद जाफरी), जो एक बिखरा हुआ आदमी, धुएं से भरे कमरे में टूटता हुआ नजर आता है और उसका गुस्सा नहीं, बल्कि उसका दुःख बाहर आता है, जो उसके शरीर को थकावट से तोड़ देता है। तो दूसरा दृश्य एक बच्चे, वासु (मोहम्मद समद), के चेहरे पर पड़ती सुबह की रोशनी की, जिसके सामने एक टूटा-फूटा सिंगल-स्क्रीन थिएटर खड़ा है। बता दें, बर्वे इन शुरुआती मिनटों में ही अपनी मुख्य बात साफ कर देते हैं कि सिनेमा वो तिजोरी है जहां गहरे घाव (Trauma) बंद रहते हैं और ये वो चाबी भी है जो शायद उन्हें खोल सकती है।
इतना ही नहीं, 'मायासभा' में 'तुम्बाड' की तरह ही एटमॉस्फेरिक थ्रिलर का माहौल है और इसके डायलॉग बहुत मजेदार है। यहां भी कहानी लालच के इर्द-गिर्द घूमती है और एक पिता-पुत्र के जटिल रिश्ते को केंद्र में रखती है, लेकिन 'मायासभा' की मुख्य भाषा धोखा है। फिल्म का नाम ही महाभारत के उस 'मायासभा' महल से प्रेरित है, जो भ्रम से भरा था और कुरुक्षेत्र युद्ध का एक कारण बना था। जहां दिखावे ढह जाते हैं और किरदारों की जिंदगी पर छाया हुआ भ्रम का धुआं छंटने लगता है।
जावेद जाफरी का किरदार परमेश्वर (जिसका अर्थ 'भगवान' है) कभी बड़ा फिल्म प्रोड्यूसर था, लेकिन अब वो अतीत के भ्रम में जी रहा है। उसका गुस्सा और हिंसा उसकी मर्दानगी साबित करने का तरीका है, जो उसे असल में नहीं मिल पाती। तो वहीं, उसका बेटा वासु (कर्ण का दूसरा नाम) अपने पिता की देखभाल के नाम पर जुल्म सह रहा है और इस टॉक्सिक विरासत को ढो रहा है। निर्देशक बर्वे पौराणिक किरदारों (रावण, परमेश्वर, वासु) का यूज उन्हें भगवान या राक्षस बनाने के लिए नहीं, बल्कि ये दिखाने के लिए करते हैं कि इंसान दोनों का दिखावा कैसे करता है।
राही अनिल बर्वे की सबसे मजेदार बात ये है कि पौराणिक कथाएं हावी होने के बाद भी, यहां का एकमात्र धर्म भौतिकवाद (Materialism) है और भक्ति पैसे के प्रति है, जहां न राम का आदर्श काम आता है और न ही कृष्ण जैसा ज्ञान। बता दें, निर्देशक राही अनिल बर्वे 'मायासभा' के माध्यम से दर्शकों के सामने एक कड़वा सच रखते हैं, जो सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे जीवन में कितना सच और कितना भ्रम है। इसकी कहानी काफी दिलचस्प है, आपको जरूर देखनी चाहिए।
Updated on:
31 Jan 2026 11:23 am
Published on:
31 Jan 2026 11:21 am

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