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चैम्बर और नालों से होकर निकली रहीं शहर में 61 साल पुरानी बिछी लीकेज पेयजल लाइनें

.इंदौर में दूषित और गंदा पानी पीने से 17 लोग काल के गाल में समा चुके हैं, तो दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती हैं। मामला इतना बड़ा हो गया कि देश में पेयजल पाइप लाइनों को लेकर सवाल उठने लगे। धौलपुर में भी ऐसे ही भयाभय हालात बने हुए हैं, जहां सालों पुरानी जर्जर पेयजल लाइनें चैम्बरों से होकर गुजर रही हैं, जो कि किसी अनहोनी को दावत दे रही हैं। शहर में आधा दर्जन जगह पाइप लाइन सीवरेज से होकर गुजर रही हैं जो कि कई लीकेज हैं।

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चैम्बर और नालों से होकर निकली रहीं शहर में 61 साल पुरानी बिछी लीकेज पेयजल लाइनें The city's 61-year-old leaking drinking water lines continue to flow through chambers and drains

- लीकेजों से गंदा पानी पहुंच रहा घरों में, अनहोनी की आशंका

-मप्र के इंदौर में 16 लोग गंवा चुके दूषित पानी पीने से अपनी जान

धौलपुर.इंदौर में दूषित और गंदा पानी पीने से 17 लोग काल के गाल में समा चुके हैं, तो दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती हैं। मामला इतना बड़ा हो गया कि देश में पेयजल पाइप लाइनों को लेकर सवाल उठने लगे। धौलपुर में भी ऐसे ही भयाभय हालात बने हुए हैं, जहां सालों पुरानी जर्जर पेयजल लाइनें चैम्बरों से होकर गुजर रही हैं, जो कि किसी अनहोनी को दावत दे रही हैं। शहर में आधा दर्जन जगह पाइप लाइन सीवरेज से होकर गुजर रही हैं जो कि कई लीकेज हैं।

शहर में पेयजल पाइप लाइनों में लीकेज और चैम्बरों का गठजोड़ लोगों को बीमार न कर दे। नाले नालियों के अंदर डिस्ट्रीब्यूटर लाइने (घरों तक कनेक्शन वाली लाइनें) शहर के अधिकांश कालोनियों और मोहल्लों में डली हुई हैं। जिनमें लीकेजों के कारण आए दिन चैम्बरों का गंदा पानी घरों तक पहुंच जाता है और लोग उसका सेवन करने को मजबूरन हैं। शहर में एक दो जगह नहीं बल्कि आधा दर्जन से भी ज्यादा जगह लाइनें लाकेज हैं, जिनमें से कई को तो महीनों तक हो चुके हैं। जिनकी शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाती। अब ऐसी स्थिति में लीकेजों के कारण चैम्बरों और नालों का गंदा पानी पीने से कोई अनहोनी होती है तो कौन उसका जिम्मेदार होगा? ज्ञात हो कि देश के सबसे स्वच्छ शहर मध्य प्रदेश के इंदौर में भी कुछ दिन पहले यही हालात बने जहां पेयजल पाइप लाइन के लीकेज होने के कारण चैम्बरों का दूषित पानी घरों में पहुंच गया जिस कारण 17 लोगों की मौत हो गई तो कई अस्पताल में भर्ती हैं।

1964में बिछाई गई थी शहर में पेयजल लाइन

पेयजल विभाग ने1964 में 30 से 40 किलोमीटर पाइप लाइन का जाल बिछाया था। जिसके बाद शहर बढ़ता गया और पेयजल पाइप लाइनों का दायरा भी। लेकिन 1964 के बाद से अभी तक यानी 61 साल बाद पाइप लाइनों की हालत खस्ताहाल हो चुकी हैं। जिनमें सबसे ज्यादा पुराना शहर के हालात हैं, जहां लाइनें बिल्कुल जर्जर हो चुकी हैं, ऊपर से शहर ड्रेनेज सिस्टम को बनाए चैम्बर और नाले लोगों को दोहरी मार देने लगे हैं। जिनका पानी इन जर्जर लाइनें के लीकेजों से घरों तक पहुंच रहा है। हां कुछ जगह शिकायत मिलने के बाद पीएचइडी लीकेजों को दुरुस्त तो करा देता है, लेकिन लाइनों की हालात बद से बदतर होने के कारण अगले दिन फिर लीकेज सामने आ जाता है। जिनसे गंदा बदबूदार पानी पीने से लोगों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पडऩे की आशंका बनी रहती हैं।

शहरभर में दो दर्जन जगह लीकेजों का अंबार

शहर में 61 साल पहले बिछाई गई पेयजल पाइप लाइनों की हालत बदतर हालातों में है, यही कारण है कि आए दिन कहीं न कहीं लीकेज सामने आते रहते हैं और गंदा पानी डिस्ट्रीब्यूटर लाइनों से होकर घरों में पहुंच रहा है। लीकेजों की बात करें तो शहर में लगभग दो दर्जन लीकेज हैं, जिनमें से अधिकतर की पाइप लाइनें चैम्बरों और नालों में से होकर निकल रही हैं। इन लीकेजों में पुराना शहर में हनुमान अखाड़ा, सुनार बगिया, कुम्हर पाड़ा, गुलाब बाग, मित्तल कोलोनी, आनंद नगर, बाड़ी रोड, अशोक विहार कालोनी और गौशाला क्षेत्र, कसाई पाड़ा, पुरानी सराय, मदीना कालोनी, भामती पुरा, कैला कालोनी, बटऊ पुरा, किरी, पटपरा, गडऱपुरा, कास्तपाड़ा सहित अन्य जगहों पर लगभग दो दर्जन लीकेज हैं। गुलाब बाग चौराहा से ही जगदीश तिराहा तक आपको पांच लीकेज मिल जाएंगे।

लोगों ने बताई अपनी पीड़ा

पुराना शहर, भामती पुरा, गडऱपुरा सहित अन्य जगहों के स्थानीय लोगों ने बताया कि नलों में आ रहे गंदे और बदबूदार पानी का प्रमुख कारण सालों पुरानी पाइन लाइनें हैं जो अब सडऩे के साथ जगह-जगह से लीकेज हो चुकी हैं। साथ ही यह पेयजल लाइन नालों और चैम्बरों में से होकर निकल रही हैं जिस कारण जब नल जाने की स्थिति में नालों का गंदा पानी रिसकर पाइप लाइनों में भर जाता है और जब नल आते हैं तो यही पानी घरों में पहुंच रहा है। हालांकि शहर के कई क्षेत्रों में नई पाइप लाइन भी बिछी हुई हैं।

अवैध कनेक्शन भी दे रहे समस्या को बढ़ावा

घरों में पहुंचने वाले गंदे पानी का एक कारण अवैध कनेक्शन भी हैं। पानी की चाह में लोग लाइनों को क्षतिग्रस्त कर कनेक्शन ले लेते हैं, लेकिन इन अवैध कनेक्शनों में से भी गंदा पानी पाइप लाइनों में भर जाता है। विभाग ने पिछले वर्ष ऐसे 600 से700 अवैध कनेक्शनों पर कार्रवाई की थी, लेकिन फिर भी सैकड़ों की संख्या में अभी भी अवैध कनेक्शन इस परेशानी को और बढ़ा रहे हैं। पीएचइडी के अनुसार शहर भर में लगभग 13500 वैध कनेक्शन हैं।

शहर में कई इलाकों में डली पेयजल पाइप लाइन पुरानी है। अगर कहीं भी लीकेजों के माध्यम से घरों में गंदा पानी पहुंचने की समस्या आती है तो उसको तुरंत ही सही कराया जाता है। जिससे लोगों को किसी प्रकार कोई परेशानी न हो।

-प्रताप सिंह, एइएन पीएचइडी

पुराना शहर से तो मानो सैतेला व्यवहार किया जा रहा है। यहां कई मोहल्लों के घरों में गंदा पानी आ रहा है। जिसकी कई बार शिकायत भी की जा चुकी है। यह गंदा पानी पाइप लाइनों के क्षतिग्रस्त होने से पहुंच रहा है। पुराना शहर में तीन से ज्यादा जगह लीकेज हैं।

कुक्कू शर्मा, पार्षद

गंदा पानी पीना शहर के लिए बेहद ही हानिकार होता है। गंदे पानी से शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले वैक्टेरिया और जीवाणु हमारे अंदर प्रवेश कर जाते हैं। जिनसे हैजा, संक्रमण, टाइफाइड, पेट संबंधी सहित किडनी और लीवर के गंभीर रोग उत्पन्न हो सकते हैं। अगर हो तो लोग पानी को उबालकर पिएं, जिससे उसमें होने वाले वेक्टेरिया मारे जाएं।

-डॉ. दीपक जिंदल, वरिष्ठ फिजीशियन