6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हाइटेक होता किसान…कर रहा स्मार्ट तकनीक से खेती

30 हजार बीघा में कृषि भूमि को किराए पर लेकर कमा रहे लाखों dholpur.सरमथुरा. खेती में असली मुनाफा बाजार की चाल समझकर किसान फसल को सही समय पर बाजार तक पहुंचा कमा सकते हैं। कड़ाके की ठंड के कारण अक्सर किसान पिछड़ जाते हैं। जिससे सीजन के समय फसल के दाम गिर जाते हैं। जागरूक […]

2 min read
Google source verification
हाइटेक होता किसान...कर रहा स्मार्ट तकनीक से खेती Farmer is becoming hi-tech...doing farming with smart technology

filter: 0; fileterIntensity: 0.0; filterMask: 0; brp_mask:0; brp_del_th:null; brp_del_sen:null; delta:null; module: photo;hw-remosaic: false;touch: (-1.0, -1.0);sceneMode: 8;cct_value: 0;AI_Scene: (-1, -1);aec_lux: 0.0;aec_lux_index: 0;albedo: ;confidence: ;motionLevel: -1;weatherinfo: null;temperature: 40;

30 हजार बीघा में कृषि भूमि को किराए पर लेकर कमा रहे लाखों

dholpur.सरमथुरा. खेती में असली मुनाफा बाजार की चाल समझकर किसान फसल को सही समय पर बाजार तक पहुंचा कमा सकते हैं। कड़ाके की ठंड के कारण अक्सर किसान पिछड़ जाते हैं। जिससे सीजन के समय फसल के दाम गिर जाते हैं। जागरूक किसान स्मार्ट तकनीक अपनाकर अगेती खेती कर लाखों रुपए कमा रहे हैं। यह तकनीक न केवल बीजों को खराब होने से बचाती है, बल्कि सीजन तक महंगे बाजार वाले महीनों में बंपर पैदावार देने का भरोसा भी देती है।

सरमथुरा उपखंड में पार्वती नदी किनारे वरेली, झांसी सहित उत्तरप्रदेश के किसान कृषि भूमि को किराए पर लेकर सब्जी की अगेती खेती को अंजाम दे रहे हैं। जो सीजन से पहले ही फसल को बाजार में पहुंचा कर मोटा मुनाफा कमाने की जुगत में हैं। किसान इस स्मार्ट तकनीक के जरिए अपनी खेती की लागत घटाकर कमाई को दोगुना कर रहे हैं और नर्सरी वेबकर भी लाखों का लाभ उठा रहे हैं।

कृषि पर्यवेक्षक धर्मेन्द्र सिंह मीणा ने बताया कि छोटे किसानों के लिए अगेती खेती वरदान है।उन्होंने बताया कि सरमथुरा क्षेत्र में ज्यादा किसान छोटे और सीमांत वर्ग के हैं। जिनके पास एक से पांच एकड़ तक जमीन है। ऐसे किसानों के लिए जमीन से ज्यादा कमाई करने का सबसे अच्छा तरीका अगेती खेती है। कृषि अधिकारियों ने बताया कि जनवरी से 15 फरवरी तक कड़ाके की ठंड पड़ती है। इस दौरान रात का तापमान 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर जाता है, जिससे खुले खेत में सब्जी के बीज अंकुरित नहीं हो पाते हैं। ज्यादातर किसान ठंड खत्म होने का इंतजार करते हैं और फरवरी के अंत में बुवाई करते हैं। नतीजा यह होता है कि सबकी फसल अप्रेल-मई में एक साथ बाजार में आती है और दाम गिर जाते हैं।

सैकड़ों बीघा में नर्सरी बनाकर अगेती सब्जी की खेती

कृषि अधिकारियों ने सब्जी की अगेती का स्मार्ट तरीका बताते हुए कहा कि सबसे पहले खेत में 1 मीटर चौड़ी बेड बनाएं और बीजों को आधा से एक सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं किसान चाहें तो पॉली बैग या प्रो.ट्रे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। प्रो.ट्रे में मिट्टी और गोबर खाद का मिश्रण भरकर उसे लो-टनल के अंदर रख दें। इस सुरक्षित माहौल में टमाटर, मिर्च, खीरा, तरबूज और खरबूज जैसे पौधों की नर्सरी मात्र 30 से 40 दिनों में तैयार हो जाती है। यह तकनीक छोटे किसानों के लिए बहुत सस्ती है। सबसे गंभीर बात यह है कि उत्तरप्रदेश के किसान सैकड़ों बीघा कृषि भूमि को 30 हजार बीघा में किराए पर लिया हुआ है। जो अगेती खेती को अंजाम देने में लगे हैं।

स्मार्ट तकनीक के प्रबंधन से मिलेगी स्वस्थ्य पौध

कृषि अधिकारी बताते हैं कि लो-टनल के अंदर पौधों को सही पोषण देना जरूरी है। बीज जमने के बाद फर्टीगेशन करें, यानी एनपीके खाद का हल्का घोल बनाकर एक दिन छोडक़र पौधों को दें। फसल के लिए 25 से 30 डिग्री सेन्टीग्रेड तापमान की आवश्यकता होती हैं। एक जरूरी बात यह है कि अगर पॉलीथीन पर धूल जम जाए, तो उसे साफ करते रहें ताकि पौधों को पर्याप्त रोशनी मिले। दिन में जब धूप तेज हो तो थोड़ी देर के लिए टनल के पर्दे खोल दें। इससे पौधों का कठोरीकरण होता है, जिससे खेत में रोपाई के बाद पौधे मरते नहीं हैं और उनका विकास तेजी से होता है।